हां, मैं प्राथमिक कक्षा की शिक्षक हूं
और यह मेरी मजबूरी नहीं
मेरा चयन है
मेरी पसंद है
मेरे जीवन का लक्ष्य है...।
ये और बात है कि
मेरे दोस्त, रिश्ते -नातेदार
और दुनिया वाले
कहते हैं, सोचते हैं
कभी-कभी सवाल उठाते हैं पीठ पीछे
कि मैं क्यों हूं आज भी एक प्राथमिक शिक्षक...।
जबकि, मेरे सारे मित्र हैं उच्च पदस्थ...!
भाई-बहनों की खट्टी-मीठी नोक-झोंक
और खिंचाई में भी मिलती टिप्पणियां
कि तुम तो हो ' पोट पोछवा मास्टर ' ...!
अब मैं कैसे बताऊं
कैसे जताऊं
अपने दिल का हाल
कि कितनी खुश हूं मैं
बनी रहकर प्राथमिक शिक्षक।
मैं कैसे बताऊं
कि मैं भूल जाती हूं
जिंदगी की सारी परेशानियां
और साथ में अपनी उम्र भी,
बच्चों के बीच रहकर
जी उठता है मेरा बचपन।
मैं जीती हूं अपने हिस्से की खुशियां
पूरी ही जिंदादिली के साथ
और मुझे मिल जाती है कुछ घंटों की राहत
इस मुखौटों से भरी दुनिया से।
वैसे, जान लें जिन्हें नहीं पता
प्राथमिक कक्षा है आधार
नींव का निर्माण
जिसपर खड़ा होता है भविष्य
बच्चों का जीवन
हां, मैं उस नींव में डाल रही जल
आनंद आएगा, जब खिलेंगे फल।
फिर भी कायम है यह मजबूरी
मैं कैसे बताऊं कि
प्राथमिक शिक्षक होना
मेरा चयन है,मजबूरी नहीं.....।
©®प्रियंका कुमारी
शिक्षिका, मध्य विद्यालय मलहाटोल, सीतामढ़ी
Comments
Post a Comment