Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2022

"उलझनें" काव्य संग्रह की समीक्षा डा. संजय पंकज द्वारा

प्रियंका प्रियदर्शिनी द्वारा लिखी "उलझनें" काव्य संग्रह की समीक्षा राष्ट्रीय स्तर के कवि साहित्यकार और नेशनल बुक ट्रस्ट के न्यासी सदस्य डा. संजय पंकज द्वारा किया गया है जिसके अंश इस प्रकार है------ प्रेम और मुक्ति के बीच अस्मिता की तलाश बहुत आसान नहीं है स्त्री-मन को जानना समझना मगर सर्वथा कठिन और असंभव भी नहीं है अगर सहज प्रेम के प्रवाह में संग संग स्त्री पुरुष का जीवन एकलय होकर प्रवाहित हो तो! यह एकलय एकरसता नहीं है। जीवन बहुत सारी विसंगतियों के साथ चलता रहता है। संघर्षों के बीच भी जीवन जीने की अदम्य लालसा के केंद्र में प्रेम होता है। प्रेम का रूप मोह भी है। प्रेम और मोह में अंतर। मोह बंधन है और प्रेम मुक्ति है। कवयित्री प्रियंका प्रियदर्शिनी के काव्य संग्रह 'उलझनें' में मोह और प्रेम का द्वन्द्व है जिसे साफ साफ मुक्ति की चाहना और अस्मिता की रक्षा के संदर्भ में देखा जा सकता है। मोह में स्व का बचा रहना स्वाभाविक है। प्रेम में स्व का सर्वथा विसर्जन हो जाता है। प्रेम की पराकाष्ठा नि:स्व हो जाने में है। अस्मिता की तलाश और पहचान की आकुलता में नि:स्व होना असंभव है। स्व के ...

शौचालय "एक संघर्ष गाथा"

  शौचलय "एक संघर्ष गाथा " टॉयलेट एक प्रेम कथा का फिल्म का  नाम  तो लगभग सभी ने सुना होगा ,पर आज हम आपके बीच एक ऐसी शिक्षिका की संघर्ष कथा रखने वाले है जिसे "शौचालय  एक संघर्ष गाथा" का नाम दिया जा सकता हैं | विवादों से बचने के लिए बिना किसी वास्तविक नामों का उल्लेख करते हुए इस आलेख को आपके बीच साझा कर रही हूँ | ................हां तो इस संघर्ष की शुरुआत होती है मेरी पहली पोस्टिंग से | आज से करीब 14 साल पहले मेरी पहली पोस्टिंग एक अत्यंत पिछड़े गाँव के प्राथमिक विद्यालय में हुई थी | मैं बहुत खुश थी की चलो जिस काम को मैं बचपन से करती आ रही हूँ अब मैं  उस कार्य को अधिकारिक तौर पर कर पाऊँगी क्योकि अब मैं एक सरकारी विद्यालय की शिक्षिका हो गयी |पहला दिन बच्चों के साथ काफी अच्छा अनुभव रहा |स्टाफ लोग भी सकरात्मक थे | पहले दिन ही पता चल गया था कि विद्यालय का शैक्षिक वातावरण काफी निम्न स्तर का था| खैर इस बारे में यहाँ चर्चा नही करूंगी | दिनभर का समय विद्यालय में बिताने के बाद अब मुझे 'हल्का' होने की  जरुरत महसूस हो रही थी ....इधर उधर नज़र दौड़ाई ,पर कही भी दिखाई नही दिया ...