Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2024

बुनियादी कक्षाओं में अंत्याक्षरी और भाषा विकास

इस आलेख के माध्यम से हम जानेंगे कि अन्त्याक्षरी का खेल बुनियादी कक्षाओं के बच्चों के साथ भी सहजतापूर्वक  करवाया जा सकता हैं और यह भाषा विकास में काफी सहायक हैं | दो वर्ष पूर्व मैंने एक आलेख लिखा था जिसका शीर्षक था- हम बच्चों से सीखते हैं जिसमें मैंने कुछ ऐसी गतिविधियों का अनुभव साझा किया था जिसकी अंतर्दृष्टि मुझे बच्चों ने प्रदान की थी या यूं कहें कि उन गतिविधियों को बच्चों ने इनोवेट किया था। उसी तर्ज़ पर एक बार फिर मेरी कक्षा के बच्चों ने मुझे एक अंतर्दृष्टि प्रदान की जिसके माध्यम से से मुझे बच्चों के शब्द भंडार में अभिवृद्धि और ध्वनि जागरुकता को मजबूत करने का अवसर कहें या एक तरीका प्राप्त हुआ। जैसा कि हम सभी शिक्षक बच्चों में भाषा विकास के हेतु विभिन्न गतिविधियों या संसाधनों का प्रयोग करते रहते हैं।पर हाल ही में इन्हीं विभिन्न गतिविधियों के क्रम में मुझे अनुभव हुआ कि अंत्याक्षरी का प्रयोग कक्षा -1 के बच्चों के लिए भी उतना ही लाभप्रद है जितना की अन्य कक्षाओं के बच्चों के लिए।चूंकि मैंने अभी तक कक्षा -1 के बच्चों के साथ अंत्याक्षरी की गतिविधि का आयोजन नही किया था और ना ही इस संबंध ...

शिक्षकों द्वारा गृह भ्रमण/अभिभावकों से संवाद

इस आलेख के माध्यम से मैं आपको अपने एक दिन की  गृह भ्रमण की यात्रा पर  ले जाना चाहती हूँ जहाँ आप मुझे अभिभावकों से संवाद स्थापित करता देख सकारात्मक महसूस करेंगे और बतौर शिक्षक FLN के अंतर्गत निर्मित शिक्षक संदर्शिका का उपयोग बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करवा पाने के सन्दर्भ में  प्रेरित होंगे | जैसा कि सर्वविदित है कि माता-पिता/अभिभावक बच्चों के प्रथम शिक्षक होते हैं और बच्चों के सर्वांगीण विकास में माता-पिता की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। खासकर तब,जब बच्चे बुनियादी कक्षाओं में अध्ययनरत हो। चूंकि राज्य का लगभग 70% राजकीयकृत विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित है और इन विद्यालयों में नामांकित अधिकांश  बच्चों की पारिवारिक पृष्ठभूमि आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई अवस्था में होती हैं। ऐसे में जाहिर सी बात है कि अभिभावकों का मुख्य ध्यान अपने परिवार के भरण-पोषण या यूं कहें कि वे रोजी-रोटी की जुगाड़ में अपना लगभग समय खर्च करते हैं और बच्चों की शिक्षा में वह अपना योगदान देने से वंचित रह जाते हैं। इसी तरह से जिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति थोड़ी...

मेरी कक्षा पर निपुण चर्चा का प्रभाव

कभी-कभी एक छोटा सा सुझाव या दो शब्द का भी कांप्लीमेंट हमारे जीवन में बड़ी लगने वाली समस्याओं का समाधान बन जाता है। बात कुछ महीने पहले की है। हमारे विद्यालय में भी बेंच-डेस्क की कमी थी। विभाग द्वारा मांग के अनुरूप बेंच-डेस्क की आपूर्ति कर दी गई। अब सभी कमरों में बेंच-डेस्क लग गए और बच्चे आनंद भी लेने लगे बेंच-डेस्क पर बैठने में। कुछ दिन मुझे भी बहुत अच्छा लगा यह परिवर्तन देखकर, क्योंकि मेरी कक्षा में बैठने के संसाधन उपलब्ध नहीं थे तो मैं डायट या अन्य जगहों के कार्यक्रम में प्रयोग किए जाने वाले पोस्टर/बैनर बच्चों के बैठने के लिए मांग कर ले आया करती थी ताकि बच्चे अच्छे से साथ में बैठ कर पढ़ सकें और विभिन्न गतिविधियों में शामिल हो सके। चूंकि मेरी कक्षा में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे साथ में बैठते हैं और इन कक्षाओं के बच्चों को अधिकाधिक खेल गतिविधि के माध्यम से ही सीखने -सीखाने की प्रक्रिया में संलग्न किया जाता है, खासकर चहक की गतिविधियों में हमें बच्चों को गोलाकार या यू आकार की आकृति में बैठाकर/खड़ा कर गतिविधियों को संचालित करने की आवश्यकता होती हैं, ऐसे में पूरी कक्षा-कक्ष में बेंच-डेस्...