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Showing posts from March, 2024

कामकाजी महिलाएं

एक मां होना तब और कठिन हो जाता है जब बच्चे के परवरिश की सारी जिम्मेदारी अकेले एक कामकाजी मां के उपर आ जाए। हाल ही में बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त अधिकांश शिक्षकों को सुदूर देहाती क्षेत्रों के विद्यालय आवंटित किए गए हैं। इन शिक्षकों में बहुत से लोग ऐसे हैं जो शहरी क्षेत्रों या राज्य से बाहर रह रहे थे। जो पुरुष शिक्षक है उनकी समस्या अलग है जो कुछ ज्यादा बड़ी नहीं कही जा सकती परन्तु जो महिला शिक्षक है और साथ में छोटे बच्चे की मां भी है, उनके लिए परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण है। अकेले सुदूर देहाती क्षेत्र में फांउडेशनल एज ग्रुप के बच्चों के साथ रहना, रोज बच्चे के साथ-साथ विद्यालय आना-जाना और विद्यालयी दायित्वों का निर्वहन करना और फिर थक-हारकर जब किराए के रूम पर जाना, जहां ना तो कोई उनका इंतजार कर रहा होता है और ना ही कोई एक ग्लास पानी या एक कप चाय बना कर देने के लिए होता है, जो कि एक बहुत ही निराशाजनक स्थिति होती हैं।              मैं आजकल रोज एक ऐसी मां को देख रही हूं जो अपने दो साल के बच्चे के साथ विद्यालय आ रही है और पूरी तन्मयता के साथ अ...