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Showing posts from December, 2022

पाठ्य पुस्तकों में उपलब्ध QR कोड और अंतर्निहित शैक्षिक सामग्री का समीक्षात्मक अध्ययन।

पाठ्य पुस्तकों में उपलब्ध QR कोड और अंतर्निहित शैक्षिक सामग्री का समीक्षात्मक अध्ययन। ************************************************ विषय - EVS   , कक्षा - 05    दिनांक - 28  /10 /2021  पाठ्य पुस्तकों दिए गए QR कोड कितने उपयोगी है अथवा QR कोड को स्कैन करने के पश्चात जो शैक्षिक सामग्री उपलब्ध हो पाती है वह कितनी प्रासंगिक है, इसी तथ्य के जांच के क्रम मे मैंने बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा जारी 5वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तिका 'पर्यावरण और हम' में दिए गए क्यू आर कोड की उपयोगिता/प्रसांगिकता की जांच दस अध्यायों  के QR कोड को स्कैन कर की। जिसके परिणामस्वरूप हमें  यह ज्ञात हुआ कि इन क्यूआर कोड में उपलब्ध सामग्री सभी अध्यायों की आवश्यकताओं को उस रूप में पूर्ण नहीं कर पा रही है जिस रूप में इसे किया जाना चाहिए। कहने का तात्पर्य है यह है कि कुछ आवश्यक संशोधन और नई सामग्री जोड़ने के साथ-साथ कुछ आवश्यक सावधानियां भी बरतनी होंगे ताकि क्यूआर कोड की सार्थकता कायम हो। आइए नीचे दिए कुछ अध्यायों के अध्ययन पर नजर डालते हैं----- * अध्याय -1 , 'पटना से नाथुला की यात्...

हम बच्चों से सीखते हैं।

हम बच्चों से सीखते हैं। *********************** हम अक्सर शिक्षा में नवाचार की बात करते हैं और बहुत सारी नवाचारी गतिविधियां बच्चों के बीच करते भी हैं ‌‌। पर कई बार बहुत सारी नवाचारी गतिविधियों का मार्गदर्शन हम शिक्षकों को बच्चों द्वारा प्राप्त हो जाता है जिसकी चर्चा लिखित रूप में हम बहुत कम ही कर पाते है। बच्चों द्वारा की गई छोटी सी भी हरकत या शरारत भी कभी -कभी हमें चीजों के बारे में सोचने की एक नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर जाती है तो आइए आपको अपने कुछ ऐसे ही अनुभवों से रुबरु करवाती हूं जिसने मेरा मार्गदर्शन बच्चों के शैक्षिक हित में किया। ************************************************ आजकल छोटे बच्चों द्वारा मुझे प्रभावी शिक्षण विधियां सीखने को मिल रही है। बच्चों ने इस धारणा को खंडित किया कि यह जरूरी नहीं है कि आप जो कुछ सोच कर या प्लान कर विधालय या कक्षा कक्ष में आते हैं, ठीक उसी प्रकार आप शिक्षण कार्य संपन्न कर पाते हैं। नये सत्र आरंभ हो गये है और इस बार शिक्षण की शुरुआत मैंने पहली दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों के साथ की है। इन बच्चों ने मुझे ऐसे अवसर उपलब्ध करवाएं जिनसे यह बात और अधि...

सेल्फी प्राइज

सेल्फी  प्राइज सेल्फी प्राईज के साथ बच्चें और उनकी शिक्षिका प्रियंका    एक साधारण सी सेल्फी एक खास परिवेश और परिस्थिति में रहने वाले बच्चों के लिए एक अमूल्य पुरस्कार और शिक्षक के लिए एक प्रभावशाली संसाधन भी बन सकता है।   क्या है सेल्फी प्राइज -  मध्य विद्यालय मलहाटोल , प्रखंड परिहार ,  सीतामढ़ी की शिक्षिका प्रियंका कुमारी द्वारा सेल्फी प्राइज नाम से एक नवाचार शुरू किया गया जिसमें वह अपने विद्यालय के नव नामांकित बच्चों को सहज करने   / अच्छा कार्य करने वाले बच्चों / कुछ अलग गतिविधियां या सवाल करने वाले बच्चों के साथ सेल्फी लेती है जिससे बच्चों में शिक्षक के प्रति अपनापन महसूस होता है और उनका विद्यालय से मजबूत जुड़ाव होता है। आइए इस आलेख में जानते हैं शिक्षिका प्रियंका कुमारी के अनुभव से कि कैसे एक सेल्फी का उपयोग आप विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों के संदर्भ में कर सकते हैं। वि द्यालय में बच्चों के ठहराव और नियमित उपस्थिति के लिए हम खेल गतिविधियों का उपयोग हमेशा से करते आए है पर कई बार ऐसा हुआ है कि मुझे बहुत सी गतिविधियों का आइडिया अपन...