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Showing posts from January, 2024

निपुण अभिभावक निपुण बच्चे

निपुण अभिभावक निपुण बच्चे ********************************* इस आलेख के माध्यम से आप जानेंगे कि अगर हमें बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करवानी है तो बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी निपुण बनाने में अपना सहयोग देना होगा। साथ ही अभिभावकों के लिए ऐसे अवसरों का भी सृजन करना होगा जिसमें वह बच्चों के हित में अपनी भागीदारी दे सकें। मैंने निपुण अभिभावक निपुण बच्चे नवाचार का प्रयोग कर अभिभावकों के लिए एक अवसर उपलब्ध करवाने की कोशिश की है जिसके माध्यम से वो बच्चों की शिक्षा में सहभागी बन सकें। किसी भी बच्चे के लिए परिवार प्रथम पाठशाला तथा माता-पिता/अभिभावक प्रथम शिक्षक होते हैं। बच्चे जब पहली बार विद्यालय आते हैं तो उस समय भी उनके पास बहुत सा ज्ञान और अनुभव होता है । वैसे तो बच्चों की शिक्षा में पूर्व में भी परिवार की भागीदारी के महत्व को स्वीकार किया गया है पर नई शिक्षा नीति 2020 में अभिभावकों एवं समुदाय की शिक्षा में सहभागिता पर विशेष बल देने की बात की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी शिक्षा में अभिभावकों की सहभागिता से संबंधित डा...

बचपन की आधारशिला : कहानियां

बचपन की  आधारशिला :  कहानियां लेखक -  प्रियंका प्रियदर्शिनी चीं-चीं और पाँच रंगीन कंकड़ ​ एक हरे-भरे बगीचे में एक नन्ही चिड़िया रहती थी— चीं-चीं। वह पहली बार अपना घर बना रही थी। उसने सूखे तिनके और घास इकट्ठे किए और एक प्यारा सा घोंसला बनाया। लेकिन जैसे ही बरसात शुरू हुई और तेज़ आंधी आई, चीं-चीं का घर बिखर गया। वह उदास हो गई और सोचने लगी, "मुझे घर की नींव में कोई मज़बूत चीज़ रखनी चाहिए ताकि मेरा घर हवा में न उड़े।" ​ चीं-चीं उड़कर एक पुराने पीपल के पेड़ के पास पहुँची। वहाँ जड़ों के पास उसे पाँच चमकते रंगीन कंकड़ मिले। वे जादुई कंकड़ थे! जब चीं-चीं ने उन्हें अपनी परेशानी बताई, तो वे एक-एक करके बोलने लगे: ​ लाल कंकड़ - मैं गोल हूँ। हम सब मिलकर तुम्हारी मदद करेंगे! ​ नीला कंकड़ - मैं चपटा हूँ। मैं घोंसले को हिलने नहीं दूँगा। ​ हरा कंकड़ - मुझे पानी से डर नहीं लगता। मैं बारिश में मज़बूत रहूँगा। ​ पीला कंकड़ - मैं गर्मी सह सकता हूँ। मैं घर को ठंडा रखूँगा। ​ बैंगनी कंकड़ - मैं सबको जोड़कर रखूँगा, जैसे एक परिवार! ​ चीं-चीं बहुत खुश हुई। उसने अपनी चोंच में कंकड़ों ...