हैलो, मैं न्यूज 18 चैनल से बोल रहा हूं। एसीएस सर द्वारा बिहार के 12 शिक्षकों को टीचर औफ द मंथ अवार्ड् दिया गया है जिसमें आपका भी नाम है। बधाई हो। हम आप का बाइट लेना चाह रहे है। क्या आप अभी विद्यालय में है...
चूंकि मैं उस समय डायट डुमरा, सीतामढ़ी में दीक्षा पोर्टल पर कोर्स लांच करने की तकनीकी प्रक्रियाओं को अपने लैपटॉप पर संपादित कर रही थी इसलिए मैंने उन्हें कहा कि आप से कुछ देर बाद बात करती हूं और मुझे इस अवार्ड की कोई सूचना नहीं मिली है। इसलिए आप मुझे इस से संबंधित कोई जानकारी है तो मेरे नंबर पर साझा कर दीजिए। कार्य की व्यस्तता अधिक थी फिर भी इस खबर को सुनकर प्रसन्नता हुई। इसलिए दो मिनट रुक कर मैंने जब अपना मोबाइल चेक किया तो देखा कि बधाई देने वाले और न्यूज लेने वालों के काॅल्स और मैसेज का अंबार लगा था। मुझे हंसी भी आई कि मुझे छोड़ कर सबको खबर हो चुकी थी कि मैं टीचर औफ द मंथ बन चुकी हूं। फिर अपने परिजनों को इस संबंध में एक मैसेज कर मैं अपने कार्य में और उत्साह के साथ व्यस्त हो गई। कोर्स लांच में जिला शिक्षा पदाधिकारी सीतामढ़ी का भी आगमन हुआ और उन्होंने भी बधाईयां दी। साथ ही मुझे प्रशिक्षण में आए सैकड़ों शिक्षकों के साथ अपने अनुभव और ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अवार्ड की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देने के लिए कहा। जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा भी शिक्षकों को इस संबंध में जानकारी दी गई और प्रेरित किया गया। कोर्स लांच के बाद मीडिया द्वारा भी मेरे अनुभव को कवर किया गया। सच कहूं तो कल का दिन जादुई एहसास दे रहा था। अपने जिले के शिक्षक साथियों को डायट प्रशिक्षण कक्ष में टीचर औफ द मंथ अवार्ड प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी और घर आने पर निपुण संवाद पत्रिका की संपादक मृदुला जी द्वारा अन्य जिलों के शिक्षकों को इस संबंध में जानकारी देने के लिए एक छोटा सा औनलाइन सेशन रखा गया, जहां मैंने अपने लैपटॉप का स्क्रीन शेयर कर शिक्षक साथियों को ई शिक्षा कोष पोर्टल पर अवार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण करने के संबंध में जानकारी साझा की। पूरे दिन की व्यस्ततम दिनचर्या होने के बावजूद पुनः मन में विचार आया कि क्यों न इस पहल की जानकारी ब्लॉग के माध्यम से भी साझा की जाए। तो आइए जानते है टीचर औफ द मंथ अवार्ड के बारे में।
टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड शिक्षा विभाग बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव महोदय डॉ एस.सिद्धार्थ द्वारा शुरू की गई एक सकारात्मक पहल है जो शैक्षिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाएगा। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करना एवं मोटिवेट करना है ताकि वह अपने कार्य को पहले से भी अधिक उत्साह और प्रसन्नता के साथ संपादित कर सके। जहां तक मेरा विश्वास है यह पहल सचमुच एक परिवर्तनकारी उद्धरण साबित होगा। चूंकि शिक्षकों के कार्यों की सराहना और सम्मान के लिए पूर्व से ही प्रति वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय और राजकीय पुरस्कार की व्यवस्था है, परंतु इन पुरस्कारों के मानकों को पूरा कर पाना सभी शिक्षकों के लिए सुगम नही है और अधिकांश शिक्षक इस पुरस्कार के बारे में आवेदन करने की सोच भी नही पाते। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए बीते वर्ष से शिक्षक दिवस पर सभी प्रखंडों में कुछ शिक्षकों को उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर सम्मानित करने की पहल शुरू की गई है, परंतु यहां भी पसंदीदा व्यक्ति अथवा पारदर्शिता की कमी एक चुनौती है जो शिक्षक समुदाय में असंतोष का वातावरण बनाती है।
परंतु इस बार अपर मुख्य सचिव महोदय(शिक्षा विभाग) द्वारा टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड की जो पहल शुरू की गई है वो कहीं न कहीं उपर्युक्त सभी चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए शिक्षकों को उनके नवाचारी प्रयासों और दायित्वों के ईमानदार निर्वहन की पहचान दिलाने में सफल हो पाएगी। अब वैसे शिक्षक जो अपने अन्य साथी शिक्षकों को गाहे-बगाहे ताने मार दिया करते थे कि "इतना मेहनत करके क्या मिल जाएगा तुम्हें" को भी एक उचित जबाब मिल जाएगा कि मेहनत करने वालों को पहचान भी मिलती है और सम्मान भी। निश्चित रूप से इस पहल से शिक्षकों में एक नवीन उर्जा का संचार हुआ है जिसे मैं अपने आस-पास के शिक्षकों के माध्यम से महसूस कर पा रही हूं। अब शिक्षक अपने कार्य को और अधिक प्रसन्नता से संपादित कर पाएंगे। प्रोत्साहन किसी भी कार्य क्षेत्र की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव एवं बढ़ोतरी लाता है। खासकर तब,जब प्रोत्साहन देने की प्रक्रिया पारदर्शी हो।
जी, हां इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अवार्ड के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, स्थानीय राजनीति से मुक्त और समान अवसर उपलब्ध करवाने वाली है। आइए कुछ बिंदुओं के माध्यम से जानते है कि टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड के लिए आवेदन करने में शिक्षकों को किन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है ----
# सर्वप्रथम शिक्षक को गूगल/क्रोम ब्राउजर के माध्यम से ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपनी टीचर आईडी और पासवर्ड के साथ लॉगिन करना होता है ।
# लॉगिन करने के पश्चात Teacher लिखे विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद बायीं ओर स्क्रीन पर टीचर रजिस्ट्रेशन और मंथली टीचर अवार्ड का विकल्प दिखने लगता है।
# अब हम मंथली टीचर अवार्ड विकल्प पर क्लिक कर के ADD ऑप्शन पर क्लिक करेंगे। Add ऑप्शन पर क्लिक करते ही अवार्ड के आवेदन का पेज खुल जाता है और वहां 13 बिन्दूओं की चर्चा की गई होती है। आइए जानते है कि इन 13 बिन्दूओं में किन-किन मुद्दों को रखा गया है ---
1. आलोच्य माह में शिक्षक की ऑनलाइन उपस्थिति का प्रतिशत कितना है। यह ऑटोमेटिक रूप से पोर्टल पर फीड होता है।
2. आलोच्य माह में बच्चों की औसत उपस्थिति कितनी है। अर्थात कुल नामांकन के विरुद्ध कितनी संख्या में बच्चों की उपस्थिति होती है। यहां भी संबंधित शिक्षक के विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या ऑटो फीड होती है।
3. शिक्षक एवं बच्चों द्वारा वर्ग कक्ष में ब्लैकबोर्ड या एफएलएन किट का उपयोग ।
4. पाठ योजना तैयार कर वर्ग कक्ष संचालन में उपयोग होता है या नहीं।
5. शिक्षण अधिगम सामग्रियों का उपयोग। अर्थात शिक्षक स्वयं के बनाए अथवा विद्यालय में उपलब्ध टीएलएम का उपयोग करते है या नहीं।
6. आलोच्य माह में मासिक मूल्यांकन का आयोजन होता है या नहीं।
7.शिक्षक प्राप्त प्रशिक्षणों का उपयोग वर्ग कक्ष विनियमन में करते है या नही।
8. बच्चों को गृह कार्य देने एवं कॉपियों की जांच करने का कार्य नियमित रूप से किया जाता है या नहीं।
9. निर्धारित कक्षा के शिक्षार्थियों के अभिभावकों के साथ बैठक नियमित रूप से की जाती है या नहीं।
10. विद्यालय की साफ सफाई एवं विद्यालय को आकर्षक बनाने में शिक्षक का योगदान किस तरह का है।
11. स्कूल ड्रेस में आने वाले बच्चों की स्थिति कितने प्रतिशत है।
12. शिक्षक द्वारा वर्ग कक्ष विनियमन में किए गए नवाचार यथा तकनीक, पुस्तकालय दीक्षा पोर्टल,ई लाॅटस, आईसीटी लैब,कला, संगीत,खेल आदि क्षेत्रों में किए गए नवाचार के उपयोग के संबंध में जानकारी साझा करनी होती है।
13. और अंत में 50 से 200 शब्दों के बीच शिक्षक को बताना होता है कि उन्हें यह पुरस्कार क्यों दिया जाना चाहिए।
दिए गए उपर्युक्त बिन्दुओं में क्रम संख्या -03 से लेकर 12 तक संबंधित प्रश्न तीन विकल्प के साथ पुछे जाते है। शिक्षक को स्वयं से संबंधित एक विकल्प का चयन करना होता है। विकल्प को सेलेक्ट करते ही संबंधित फोटो अपलोड करने का विकल्प दिखने लगता है। यहां शिक्षक 2 से 5 फोटो अपलोड कर सकते है। फोटो का साइज 200 kb तक का होना चाहिए। अगर आपके फोटो का साइज बड़ा है तो आप उसे कम्प्रेस कर छोटा कर ले। कम्प्रेस करने के लिए गूगल अथवा प्ले स्टोर पर उपलब्ध रिसाइजर ऐप्प की मदद आप ले सकते है। तो इस प्रकार से क्रम संख्या 03 से लेकर 11 तक आप संबंधित प्रश्न के अनुरूप फोटो अपलोड करें और क्रम संख्या 12 में आप 2mb तक का एक पीडीएफ अपलोड कर लें। अंत में आपको पुरस्कार क्यों दिया जाना चाहिए के संबंध में लिख कर आवेदक सबमिट करने वाले विकल्प पर क्लिक करें। क्लिक करने के बाद एक ओटीपी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आएगा। ओटीपी सबमिट कर आप अपना आवेदन फाइनली सबमिट कर पाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया प्रत्येक महीने के 1 तारीख से लेकर 10 तारीख तक रहती है। उदाहरणार्थ - नवम्बर महीने के पुरस्कार के लिए आवेदन 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक सबमिट करने का विकल्प उपलब्ध था। शिक्षक चाहे तो आवेदन को ड्राफ्ट के रूप में भी सेभ कर अपनी सुविधानुसार निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना आवेदन सबमिट कर सकते हैं।
आवेदन की यह प्रक्रिया बहुत ही सरल रखी गई है जिसके लिए मैं विभाग के प्रति आभार व्यक्त करती हूं। क्योंकि टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड के माध्यम से शिक्षकों को सरल तरीके एवं स्वतंत्र रूप से अपने कार्य को साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। अन्यथा बहुत से अच्छे शिक्षक स्थानीय/कार्यालीय राजनीति या व्यक्तिगत द्वेष के शिकार हो जाते है और उनके कार्य व नवाचारी प्रयासों को उचित सम्मान या पहचान नही मिल पाती है जो कि कहीं न कहीं शिक्षकों की वास्तविक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
सच कहूं तो मुझे इस पहल से बहुत ही आशाएं है। मुझे विभिन्न प्रशिक्षणों एवं अपने नवाचारी प्रयासों के कारणों हजारों शिक्षकों से जुड़ने का मौका मिला है और निजी तौर पर भी सैकड़ों की संख्या में अपने जिले के शिक्षकों से जुड़ी हुई हूं तो मैं इस पहल की महत्ता को बहुत ही गंभीरता के साथ महसूस कर पा रही हूं। हो सकता है सभी मेरी भावनाओं से सहमत नही हो, बहुत लोग इसके नकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करें, पर मुझे लगता है कि हमारा प्रथम दायित्व किसी भी नये पहल से आ रहे सकारात्मक बदलाव एवं प्रभावों के अध्ययन एवं उनके प्रसार पर केंद्रित होना चाहिए। मैं इससे पूर्व विभिन्न पुरस्कार से सम्मानित हूं और साथ ही मैं राजकीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका भी हूं, फिर भी मैं टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड पाकर बेहद सकारात्मक महसूस कर पा रही हूं। मेरे अंदर यह सकारात्मकता अवार्ड के लिए चयनित होने से अधिक इस पहल की शुरुआत होने के कारण है, क्योंकि अब हमारे उन सभी शिक्षक साथियों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित होने का अवसर मिल पाएगा जिन्हें विभिन्न कारणों से यह अवसर प्राप्त नहीं हो पाता था और वो स्वयं को अपेक्षित महसूस करते थे।
अंतत: अपने सभी शिक्षक साथियों से यही कहूंगी कि प्रसन्नचित्त हो कर पुरे हृदय से अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कीजिए। साथ ही अपने कार्यों को फोटो/वीडियो एवं लेखन के माध्यम से डाॅक्यूमेंट करें और ई शिक्षा कोष पोर्टल पर टीचर ऑफ़ द मंथ अवार्ड के लिए आवेदन भी करें। पुनः एक बार शिक्षा विभाग बिहार सरकार एवं अपर मुख्य सचिव महोदय एस सिद्धार्थ सर को हृदय से आभार।
धन्यवाद।
प्रियंका कुमारी, शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल, परिहार
जिला -सीतामढ़ी, बिहार।
संपर्क - pkjha2209@gmail.com
वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
https://youtu.be/sr5c2SHir84?si=XuxCo5QOdtYSxver
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