प्रसंग -1 जते हमर बच्चा सरकारी में उजिया गेल ओते त प्राइवेट में धके कुछो न भेल - गोनिया देवी, अभिभावक, मध्य विद्यालय मलहाटोल। प्रसंग -2 मैडम जी,आप हमारे गांव के स्कूल में होती तो मैं अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से नाम कटवा कर सरकारी विद्यालय में लिखवा देता - राजमिस्त्री, विद्यालय की चारदीवारी निर्माण, रंजीतपुर, डुमरा। कभी-कभी हम शिक्षकों को कुछ ऐसी उपर्युक्त लाइनें अभिभावकों से अनायास ही सुनने को मिल जाती है जिससे हम अंदर तक रोमांचित हो जाते है और अपने आप में एक नवीन उर्जा का संचार महसूस करने लगते हैं। प्रशंसा सभी को पसंद होती है। यह एक स्वाभाविक मानवीय गुण हैं। पर जब माहौल या कार्य संस्कृति बेहतर नही हो और साथ ही कई कोशिशों के बावजूद अपेक्षित परिणाम भी प्राप्त नहीं हो, इन नकारात्मक स्थितियों के बीच अचानक से कुछ प्रशंसा के शब्द आपके कानों से टकराते है तो आप में सकारात्मकता और नवीन उर्जा का संचार स्वाभाविक रूप से महसूस होने लगता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मैं मिट्टी के टीएलएम तो पहले से बना ही रही थी,पर जब मुझे शैक्षिक संदर्भ में बालू में छिपे पत्थरों को देखकर अं...
WE,THE PEOPLE OF INDIA,having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens:JUSTICE,social,economic and political;LIBERTY of thought,expression,belief,faith and worship; EQUALITY of status and of opportunity; and to promote among them all FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity and integrity of the Nation;