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Showing posts from October, 2024

ट्रेन का सफर और मिशन निपुण

मिशन निपुण कहता है हर बच्चा समझ के साथ सीखें और हर बच्चा निपुण बने। इस आलेख के माध्यम से आप जानेंगे कि एक शिक्षक  विद्यालय की सीमाओं से बाहर भी अपने लक्ष्यों की दिशा में प्रयासरत और कार्यरत रहते है। पिछले कुछ समय से बुनियादी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों में डिकोडिंग कौशल या यूं कहें कि अक्षरों या संख्या को उसके अव्यवस्थित क्रम में भी पहचान पाने की कौशलों को विकसित करने पर काम कर रही हूं। इस क्रम में अपने स्कूल के बच्चों के अतिरिक्त अन्य जगहों के बच्चों से भी मिल कर बातचीत कर के उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करती रहती हूं।  इसी क्रम में कुछ दिनों पूर्व पटना से सीतामढ़ी आने वाली ट्रेन के सफर में एक 4-5 साल की बच्ची पर नजर पड़ी जो मेरे सामने वाली सीट पर बैठी थी। उससे मैंने नाम पुछा तो मां की ओर देखने लगी। मां ने कई बार जब कहा तो उसने अपना नाम श्रेया बताया। मां से बातचीत कर पता चल गया था कि बच्ची पूर्वी चंपारण के किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में नर्सरी में पढ़ रही है। फिर मैंने बच्ची से उसके पसंदीदा खेल और दोस्त के बारे में बात की। इसके बाद बच्ची से हिंदी-अंग्रेजी की ...

विद्यालयों में अनुश्रवण/अनुसमर्थन

पिछले 17 वर्षों से अधिकारिक रूप से शिक्षण कार्य से जुड़ी हूं। इस दौरान बहुत से लोगों यथा -विभागीय पदाधिकारियों, बीआरपी, जनप्रतिनिधि, जनसामान्य आदि आदि को विद्यालय में आते-जाते देखती रही हूं। जितने भी लोग आए उन सभी का कहीं न कहीं बच्चों की शिक्षा और विद्यालयी व्यवस्था के साथ दायित्व जुड़ा था। परंतु आज तक मैंने किसी को भी बच्चों या शिक्षकों के साथ बैठकर बातें करते हुए कभी नहीं देखा। कभी भी किसी ने शिक्षकों को या बच्चों को क्या कुछ परेशानियां हो रही है या फिर प्रतिकूल वातावरण/परिस्थितियों में भी शिक्षक कक्षा में बच्चों के लिए जो प्रयास कर रहे हैं , उसे देखने या जानने में किसी की कोई दिलचस्पी नहीं दिखी। अगर कुछ दिखा तो सिर्फ निरीक्षणकर्ता वाला रसूख.....जिसकी बच्चों की शिक्षा में कोई उपयोगिता /सार्थकता नही थी।                आज मैं यह आलेख इसलिए लिख रही हूं कि हाल ही में पटना से कमलनाथ झा जी जो कि हमारे जिले सीतामढ़ी में एफ एल एन की जिला स्तरीय बैठक के लिए आए थे, उन्होंने मेरे विद्यालय के भ्रमण की इच्छा जताई थी और मैं उन्हें अपने विद्यालय ले भी गई थी। ...

Let's Inspire Bihar !" या "आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार।

आइए जानते हैं आदरणीय विकास वैभव सर के शब्दों में कि क्या है ? "Let's Inspire Bihar !" या "आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !"  watch full video  https://youtu.be/fOJojSKnAwk?si=91-7KuZLpx4s3ORb Follow on Facebook https://www.facebook.com/share/sdU4rL6k1ATDB6Ae/?mibextid=qi2Omg #letsinspirebihar क्या है, यह जानने के पूर्व सर्वप्रथम आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या आप मानते हैं कि संपूर्ण भारतवर्ष के उज्ज्वलतम भविष्य की प्रबल संभावनाएं कहीं न कहीं उसी भूमि में समाहित हो सकती हैं जिसने इतिहास के एक कालखंड में संपूर्ण अखंड भारत के साम्राज्य का नेतृत्व किया था और वही भी तब जब न आज की भांति संचार के माध्यम थे, न विकसित मार्ग और न प्रौद्योगिकी !  आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या हमें यह स्मरण नहीं है कि बिहार ही #ज्ञान की वह भूमि है जहाँ वेदों ने भी वेदांत रूपी उत्कर्ष को प्राप्त किया तथा ज्ञान के प्राचीन बौद्धिक परंपरा की जब अभिवृद्धि हुई तब इसी भूमि ने बौद्ध और जैन धर्मों के दर्शन सहित अनेक तत्वों एवं सिद्धांतों के जन्म के साथ नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे विश्वविद्याल...