प्रारंभिक विद्यालयों में कला शिक्षकों की आवश्यकता ------------------------ बुनियादी कक्षाओं के बच्चे कुम्हार के कच्चे मिट्टी के समान होते हैं जिसे मनचाही आकृति में ढाला जाना सरल होता है। परंतु एक बार जब मिट्टी पक जाए तो उसे फिर लक्षित आकार देना असंभव सा हो जाता है। बच्चों में किसी भी चीज को ग्रहण करने की क्षमता प्रारंभिक बाल्यावस्था के दिनों में अपने चरमोत्कर्ष पर होती है परंतु जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है उनके लिए ग्रहणशीलता का सिद्धांत जटिल होता जाता है। बच्चे इन प्रारंभिक बाल्यावस्था के दिनों में अधिक से अधिक ग्रहण करते हैं और इसका असर भविष्य में उनकी सीखने की क्षमता, व्यवहार, सृजनात्मकता और जीवन कौशल पर भी पड़ता है। इसलिए बुनियादी कक्षाओं से ही बच्चों को अधिक से अधिक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल उपलब्ध करवाया जाना चाहिए जिससे उन्हें अधिक अनुभव प्राप्त हो और उनकी ग्रहणशीलता में सकारात्मक बढ़ोत्तरी हो सकें। मैंने इस उम्र के लगभग सभी बच्चों में देखा है कि वो ड्राइंग/पेंटिंग करने में बहुत रुचि लेते हैं। कुछ बच्चे बिना किसी मदद के ...
WE,THE PEOPLE OF INDIA,having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens:JUSTICE,social,economic and political;LIBERTY of thought,expression,belief,faith and worship; EQUALITY of status and of opportunity; and to promote among them all FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity and integrity of the Nation;