सीता आज भी प्रासंगिक हैं / जानकी की प्रासंगिकता वर्तमान संदर्भ में। ************************************************ जनक नंदिनी सीता आदर्श की प्रतिमूर्ति हैं। वो एक आदर्श पुत्री,पत्नी, बहू, मां और स्वाभिमान से भरपूर ममतामयी नारी थी। सीता की सहनशीलता और क्षमाशीलता अपने आप में एक दुर्लभ संयोग है। हम सभी भाग्यशाली हैं कि मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से हम जन्मभूमि या कर्मभूमि के रूप में जुड़े हुए हैं। बतौर स्त्री मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती हूं कि मैं सीतामढ़ी वासी हूं और मेरा जन्म इस पावन भूमि पर हुआ है। एक पुत्री के रूप में सीता ने उन सभी संस्कारों को बखूबी ग्रहण किया जिससे वो पुत्री के रूप में भी जगत के लिए पूजनीय और उदाहरण स्वरूपा हैं। मैंने सीता के सहनशील व्यक्तित्व से प्रभावित होकर एक मुक्तक लिखी थी जो इस प्रकार है - कभी कभी सोचती हूं कि इतनी सहनशक्ति कहां से आई मुझमें, फिर याद आया कि मैंने जन्म लिया उस पावनभूमि पर जहां माँ सीता अवतरित हुईं और सहनशीलता का दूसरा नाम तो सिया ही है! सही कहा ना...!! देवी सीता को सहनशक्ति का उदाहरण कहने के पीछे मेरा अर्थ उस समय ...
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