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Showing posts from May, 2025

प्राथमिक कक्षाओं की शिक्षक

हां, मैं प्राथमिक कक्षा की शिक्षक हूं  और यह मेरी मजबूरी नहीं  मेरा चयन है  मेरी पसंद है  मेरे जीवन का लक्ष्य है...। ये और बात है कि  मेरे दोस्त, रिश्ते -नातेदार  और दुनिया वाले  कहते हैं, सोचते हैं  कभी-कभी सवाल उठाते हैं पीठ पीछे  कि मैं क्यों हूं आज भी एक प्राथमिक शिक्षक...।  जबकि, मेरे सारे मित्र हैं उच्च पदस्थ...! भाई-बहनों की खट्टी-मीठी नोक-झोंक  और खिंचाई में भी मिलती टिप्पणियां  कि तुम तो हो ' पोट पोछवा मास्टर ' ...! अब मैं कैसे बताऊं  कैसे जताऊं  अपने दिल का हाल  कि कितनी खुश हूं मैं  बनी रहकर प्राथमिक शिक्षक। मैं कैसे बताऊं  कि मैं भूल जाती हूं  जिंदगी की सारी परेशानियां  और साथ में अपनी उम्र भी, बच्चों के बीच रहकर  जी उठता है मेरा बचपन। मैं जीती हूं अपने हिस्से की खुशियां पूरी ही जिंदादिली के साथ और मुझे मिल जाती है कुछ घंटों की राहत  इस मुखौटों से भरी दुनिया से। वैसे, जान लें जिन्हें नहीं पता  प्राथमिक कक्षा है आधार  नींव का निर्माण  जिसपर खड़ा ...

अमरूद के फूल- अनदेखा सौंदर्य

आज छत से सटे अमरुद के पेड़ ने एकाएक मेरा ध्यान खींचा…! हरे-हरे पतों के बीच सफेद रंग के खूबसूरत फूलों को देखकर मैं बिल्कुल खो सी गई। मुझे आश्चर्य लग रहा था कि आखिर मैं इतने वर्षों तक अमरुद के फूलों की खूबसूरती महसूस करने से कैसे वंचित थी। अब तक के देखे गए सारे फूल मुझे अमरुद के इस फूल के सामने कुछ नहीं लग रहे थे। ऐसा लग रहा था कि सफेद पत्तियों के बीच से फूलझड़ी जला रखी हो किसी ने। फटाफट कुछ तस्वीरें ली और सोचा कि रील्स के रूप में इसे फेसबुक पर पोस्ट करुंगी। कैप्शन के रूप में कुछ काव्यात्मक लाइन भी लिखी, पर पता नहीं क्यों फूलों की तस्वीर देखकर बार -बार ऐसा लग रहा था कि नहीं-नहीं..जितने खूबसूरत यह फूल लग रहें है उसके अनुरूप ये चार लाइनें इन्हें जस्टिफाई नही कर पा रही…बहुत सी क्षणिकाएं लिखी और मिटाई। हृदय पूरी तरह से अमरुद के फूलों की सादगी में डूबा था। कभी इन फूलों की तुलना अपने आप से, तो कभी अपने प्रियतम के व्यवहार से, तो कभी दुनियादारी से तो कभी अन्य फूलों से तुलनात्मक रूप में अंतर्मन में कर रही थी…. फिर अंततः अन्य फूलों के रुप -गुण को ही आधार बनाते हुए कुछ लिखने के ख्याल ने...

Mother Tongue and the Teacher: Challenges and Possibilities in Primary Education in the Digital Era

Mother Tongue and the Teacher: Challenges and Possibilities in Primary Education in the Digital Era The digital age has opened new avenues in the field of education. Social media and digital platforms are now flooded with classroom videos, especially from teachers in government schools. In fact, their online presence often surpasses that of private school educators. If you are a part of any educational group on platforms like WhatsApp, Telegram, or Facebook, you’ll find a constant stream of teaching videos being shared every minute. This trend reflects a positive shift—teachers are now more open to sharing their classroom practices. These shared experiences serve as inspiration and motivation for other educators, many of whom try to adopt or adapt such innovative practices in their own classrooms. However, amid this wave of digital sharing lies a critical issue that deserves attention—the choice of language used while teaching, especially in early grades like Grade 1. A ...