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Showing posts from January, 2023

सपनों की शॉपिंग

जब चीजें हमारी पहुंच से बाहर हो तो हम सिर्फ खुली आंखों से देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं पर उसकी शाॅपिंग हम सिर्फ सपनों में ही कर पाते हैं। 'सपनों की शॉपिंग' की कहानी दो गरीब बच्चियों के संदर्भ में है जो दिसम्बर की सर्द रात में एक शापिंग मॉल में घूम-घूम कर अपनी पसंद की चीजें तय कर रही थी । यह देखना काफी पीड़ादायक था कि उन बच्चियों के पैर में ना चप्पल थे और ना ही शरीर पर पूरे कपड़े । ************************************************ अक्सर मुझे जब इंतजार करना पड़ता है तो मैं पास के किसी माॅल में चली जाती हूं। मेरे औफिस के बगल में भी वी 2 नाम से एक माॅल है जहां अक्सर ही मैं घर से गाड़ी आने के इंतजार में चली जाया करती हूं और चीजों को देखकर टाइमपास कर लेती हूं। कभी -कभी बिना जरूरत के भी कुछ अच्छा लग जाने पर ले भी लेती हूं।  कल भी इसी तरह से हुआ। मैं गाड़ी के इंतजार में पास वाली माॅल चली गई। फर्स्ट फ्लोर पर घूमते हुए मुझे कपड़ों वाले सेक्शन के दूसरी ओर से दो बच्चों की खुसर-फुसर सुनाई दी। ऐसा लग रहा था जैसे वो चीजों का बंटवारा कर रहे हो कि ये वाला मेरा है तो वो वाला मैं ही लूंगी। मैं उन ...