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कक्षा-कक्ष में पेंसिल/कलम की सहज उपलब्धता।

आज का नवाचार - पेंसिल/कलम की सहज उपलब्धता। छोटे बच्चों में एक और सबसे बड़ी समस्या पेंसिल/कलम गुम हो जाने,घर पर छूट जाने या किसी अन्य बच्चे के द्वारा ले ली जाने की होती है। ऐसे में बच्चे कहते है कि हमारे पास तो लिखने के लिए कुछ है ही नहीं। कुछ बच्चों में यह आदत घर कर जाती है कि वो बिना पेंसिल/कलम के आते हैं और अक्सर शिक्षक से उनकी कलम या हर बार एक नई पेंसिल ले जाते हैं। मैं खासकर इस समस्या से बहुत रुबरु होती रहती हूं, क्योंकि मेरे बच्चों की पारिवारिक पृष्ठभूमि इस तरह की है जहां अगर पेंसिल एक बार गुम हुई तो फिर वापस नया उपलब्ध हो पाना असंभव सा काम होता है। आज इस समस्या का हमनें एक स्थायी हल निकाला। बच्चों से बात की गई और विचार रखा गया कि सभी के लिए एक-एक पेंसिल होगी पर वह क्लासरूम में लिखने के बाद वापस रख दी जाएगी। सबने सहमति जताई। अगले दिन मैं पेंसिल की तीन पैकेट लेकर आई। साथ ही मुझे याद आया कि विधानसभा चुनाव के समय मोबाइल रखने के लिए जूट की पाॅकेट बोर्ड दी गई थी जिसमें बड़े काले रंग में एक से दस तक की संख्या भी लिखी हुई थी जो कि बच्चों के सीखने और पेंसिल रखने के...
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सीतामढ़ी का अभिनव नवाचार "फोक टीएलएम" : मिट्टी एवं पत्थर से बनी खेल गतिविधि आधारित शिक्षण अधिगम सामग्री

नई शिक्षा नीति 2020 में गतिविधि आधारित शिक्षण,स्थानीय संसाधनों के उपयोग एवं खिलौना आधारित शिक्षाशास्त्रीय पहलुओं पर विशेष बल दिया गया है ताकि बच्चे बिना किसी दबाव के अपने परिवेश में सीख सकें। खासकर जब बात बुनियादी कक्षाओं के बच्चों की शिक्षा की हो तब यह बातें और आवश्यक हो जाती है।कक्षा-3 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के सृदृढी़करण हेतु निपुण भारत मिशन जैसे व्यापक एवं महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि बच्चे समझ के साथ सीख सकें। इस क्रम में विभिन्न स्तरों पर सरकारों,शिक्षण संस्थानों एवं शिक्षकों द्वारा भी नित नए प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा ही कुछ प्रयास मैंने भी अपनी कक्षा के बच्चों के लिए किया जो आज शिक्षा जगत के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया।  कुछ वर्ष पूर्व कक्षा में जब मैंने बच्चों को कंचे की गोली से खेलने के लिए झगड़ते देखा और इस बात की शिकायत बच्चों से मुझ तक पहुंची वहीं मुझे मिट्टी की गोलियां बनाने की प्रेरणा दे गया। बच्चों को कंचे के आकार की 5 मिट्टी की गोलियां बनाने का होमवर्क दिया। कल हो कर सभी मिट्टी की सुंदर गोल-गोल गोलियां बना कर ले आएं। म...

अभिभावकों और बच्चों का एक साथ सीखना

दृश्य -1 साक्षी के दादाजी उसकी कक्षा में बैठकर उसके सभी सहपाठियों के बीच कहानी सुना रहे है और वो मन ही मन गर्वीली सी मुस्कान लिए सबके साथ कहानी सुन रही है। दृश्य -2 आदित्य अपनी दादी के साथ बैठकर एक सादे पेज पर कलर पेन्सिलों के साथ ड्राइंग कर रहा है। उसकी दादी और वो दोनों एक ही समय में एक ही पेज पर ड्राइंग कर रहे है और आपस में बातचीत भी कर रहे है। दृश्य -3 महिमा अपने घर के आंगन में अन्य भाई-बहनों के साथ मां के निकट बैठी है और उसकी कक्षा की शिक्षिका उसकी मां से उन्हीं की भाषा में बात कर रही है और बता रही है कि एक शिक्षक और अभिभावक साथ में मिलकर काम करें तो बच्चों का सर्वांगीण विकास कितना सरल हो जाएगा। साथ ही वो अपने बुनियादी कक्षाओं के बच्चों की शिक्षा में कैसे अपना सहयोग दे सकती है। दृश्य -4 स्कूटी से जा रही शिक्षिका रास्ते में रुक कर खेतों से घास के भारी-भरकम गट्ठर सर पर लिए जा रही महिलाओं को रोककर और उनके गट्ठर नीचे रखवाकर पेड़ की छांव में बैठकर उन्हें अपने पोते-पोतियों को रात में सोते समय कोई कहानी या अनुभव सुनाने की बात करती है और उनकी कविता -कहानी से बच्चों के शिक्षण पर...