आज छत से सटे अमरुद के पेड़ ने एकाएक मेरा ध्यान खींचा…! हरे-हरे पतों के बीच सफेद रंग के खूबसूरत फूलों को देखकर मैं बिल्कुल खो सी गई। मुझे आश्चर्य लग रहा था कि आखिर मैं इतने वर्षों तक अमरुद के फूलों की खूबसूरती महसूस करने से कैसे वंचित थी। अब तक के देखे गए सारे फूल मुझे अमरुद के इस फूल के सामने कुछ नहीं लग रहे थे। ऐसा लग रहा था कि सफेद पत्तियों के बीच से फूलझड़ी जला रखी हो किसी ने। फटाफट कुछ तस्वीरें ली और सोचा कि रील्स के रूप में इसे फेसबुक पर पोस्ट करुंगी। कैप्शन के रूप में कुछ काव्यात्मक लाइन भी लिखी, पर पता नहीं क्यों फूलों की तस्वीर देखकर बार -बार ऐसा लग रहा था कि नहीं-नहीं..जितने खूबसूरत यह फूल लग रहें है उसके अनुरूप ये चार लाइनें इन्हें जस्टिफाई नही कर पा रही…बहुत सी क्षणिकाएं लिखी और मिटाई। हृदय पूरी तरह से अमरुद के फूलों की सादगी में डूबा था। कभी इन फूलों की तुलना अपने आप से, तो कभी अपने प्रियतम के व्यवहार से, तो कभी दुनियादारी से तो कभी अन्य फूलों से तुलनात्मक रूप में अंतर्मन में कर रही थी…. फिर अंततः अन्य फूलों के रुप -गुण को ही आधार बनाते हुए कुछ लिखने के ख्याल ने स्थायी रुप लिया।
अमरुद का फूल: अस्तित्व की सादगी
कुछ फूल हैं जो खिलते हैं,
रंगों का भव्य संसार लिए,
तो कुछ अपनी सुगंध से
वातावरण को मुग्ध किए।
जैसे,
गुलाब की आभा में एक दिखावा है,
और चमेली की महक में
क्षणिक मोह का बुलावा है।
हर सौंदर्य अपनी नश्वरता का
बोझ ढोता है,
और अपने ही प्रकाश में
अंततः खोता है।
पर यह अमरुद का फूल...
जिसका अस्तित्व
किसी प्रदर्शन का मोहताज नहीं।
यह न रंगों की होड़ में
उतरता है,
न ही सुगंध की प्रतिस्पर्धा में
उलझता है।
यह चुपचाप करता है कर्म
बिना कुछ बोले ही
जीवन का सार कहता है।
इसकी सादगी में ही
सच्चा प्रेम निहित है,
और अनासक्ति में ही
इसकी स्थिरता विहित है।
इसे न प्रशंसा की चाह है,
न ही चकाचौंध की लालसा
यह तो बस फल बनकर
स्वयं को अर्पित करता है
और देता है संदेश
सेवा ही जीवन का सत्य व सुकून!
विभिन्न फूलों के रंग और खूशबू उसे खास बनाते है जो दुनिया के नजर में भी होती है…पर दुनिया अमरुद के सादे सफेद गंधरहित फूल को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है, जो चुपचाप अपनी सुंदरता को एक बड़े उद्देश्य के लिए न्योछावर कर देता है।
गुलाब,चंपा,चमेली,लिली हो या ट्यूलिप आदि अपनी सुन्दरता या तीखी खुशबू से सबका ध्यान खींचती हैं और वे अपनी विशिष्टता का प्रदर्शन करती हैं। उनके फूल अपने सौंदर्य के लिए सराहे जाते हैं, उन्हें तोड़ा जाता है, गुलदस्तों में सजाया जाता है। वे तात्कालिक आनंद और आंखों का सुख प्रदान करते हैं।
इसके विपरीत, अमरूद का फूल, विनम्र और अलक्षित, अपनी सुंदरता को प्रचारित नहीं करता। वह छोटा, सफ़ेद, लगभग अदृश्य होता है, अक्सर पत्तियों के बीच छिपा हुआ। उसमें गुलाब जैसी दिखावटी चमक या चमेली जैसी तीव्र सुगंध नहीं होती। वह अपनी 'पहचान' को त्याग देता है, न कि उसे उजागर करता है।
यही त्याग अमरूद के फूल को एक अनूठा सौंदर्य प्रदान करता है। वह जानता है कि उसकी नियति केवल एक क्षणिक फूल बने रहना नहीं है, बल्कि एक ऐसे दैवीय फल में रूपांतरित होना है जो न केवल स्वाद में अद्वितीय है, बल्कि पोषण से भरपूर है। यह एक ऐसा फल है जिसके लिए बच्चे पेड़ों से ऐसे लिपट जाते हैं, जैसे उन्हें माँ के आँचल में प्यार और सुकून का खजाना मिल गया हो।
यह सुंदरता सिर्फ आँखों को भाने वाली नहीं, बल्कि परिणामोन्मुखी है। अमरूद का फूल अपनी सुंदरता को एक बड़े और अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य के लिए समर्पित कर देता है। वह खुद को मिटाकर, दूसरों को जीवन और मिठास देता है। यही खामोश समर्पण, यही अदृश्य बलिदान, अमरूद के फूल को गुलाब और चमेली से अलग और कहीं अधिक गहरा सौंदर्य प्रदान करता है। उसकी सुंदरता उसकी विनम्रता में, उसके त्याग में और उसके द्वारा उत्पन्न होने वाले आनंद में निहित है।इंसान को भी अमरुद के फूल की तरह सादगी से परिपूर्णहोना चाहिए और उसके गुणों को अपनाना चाहिए।
धन्यवाद।
प्रियंका कुमारी
शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल, परिहार
जिला -सीतामढी़, बिहार।
ई-मेल - pkjha2209@gmail.com
Comments
Post a Comment