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बुनियादी कक्षाओं में अंत्याक्षरी और भाषा विकास


इस आलेख के माध्यम से हम जानेंगे कि अन्त्याक्षरी का खेल बुनियादी कक्षाओं के बच्चों के साथ भी सहजतापूर्वक  करवाया जा सकता हैं और यह भाषा विकास में काफी सहायक हैं |

दो वर्ष पूर्व मैंने एक आलेख लिखा था जिसका शीर्षक था- हम बच्चों से सीखते हैं जिसमें मैंने कुछ ऐसी गतिविधियों का अनुभव साझा किया था जिसकी अंतर्दृष्टि मुझे बच्चों ने प्रदान की थी या यूं कहें कि उन गतिविधियों को बच्चों ने इनोवेट किया था। उसी तर्ज़ पर एक बार फिर मेरी कक्षा के बच्चों ने मुझे एक अंतर्दृष्टि प्रदान की जिसके माध्यम से से मुझे बच्चों के शब्द भंडार में अभिवृद्धि और ध्वनि जागरुकता को मजबूत करने का अवसर कहें या एक तरीका प्राप्त हुआ।

जैसा कि हम सभी शिक्षक बच्चों में भाषा विकास के हेतु विभिन्न गतिविधियों या संसाधनों का प्रयोग करते रहते हैं।पर हाल ही में इन्हीं विभिन्न गतिविधियों के क्रम में मुझे अनुभव हुआ कि अंत्याक्षरी का प्रयोग कक्षा -1 के बच्चों के लिए भी उतना ही लाभप्रद है जितना की अन्य कक्षाओं के बच्चों के लिए।चूंकि मैंने अभी तक कक्षा -1 के बच्चों के साथ अंत्याक्षरी की गतिविधि का आयोजन नही किया था और ना ही इस संबंध में कभी किसी से कोई अनुभव सुन रखा था कि किन्हीं के द्वारा कक्षा 1 अथवा 2 में अंत्याक्षरी की गतिविधि करवायी जा रही है। मैंने कुछ शिक्षकों और शिक्षाविद् से भी बात की इस बारे में तो उन्होंने भी बताया कि अंत्याक्षरी का प्रयोग उन्होंने अभी तक पहली या दूसरी कक्षा के लिए नही किया है। इसलिए यह अनुभव मेरे लिए रोमांचक था।

तोआइए जानते हैं कि आखिर बच्चों ने ऐसा क्या किया जिसने मुझे अंत्याक्षरी की गतिविधि को पहली कक्षा में अनवरत जारी रखने की प्रेरणा दी।

….उस दिन मौसम अपेक्षाकृत बहुत गर्म और उमस भरा था। कक्षा में एक ही पंखा है जो कि बार-बार बिजली कटने के कारण और उमस का माहौल बना रही थी। ऐसे में बच्चे बहुत परेशान हो रहे थे। मैंने बच्चों का मन बहलाने के उद्देश्य से कहा कि अभी हमलोग एक ऐसी खेल गतिविधि करेंगे जिससे कि सारी गर्मी दूर भाग जाएगी। सभी बच्चे हंसने लगे तभी बच्चों के बीच से पहली कक्षा के छात्र रजनीश की आवाज आई कि दीदी अंत्याक्षरी खेलवाइए ना…. मैंने प्रतिक्रिया देने में कुछ सेकेंड का समय लिया तब तक कक्षा-2 की छात्रा अकांक्षा और अंजली ने भी बोला कि हां दीदी अंत्याक्षरी खेलवाइए। तब मैंने पहली कक्षा के बच्चों की ओर देखकर कहा कि सच में अंत्याक्षरी खेलोगे आप सब। तब एक और छात्र अमृत ने भी कहा कि हां-हां दीदी अंत्याक्षरी खेलवाइए। 
फिर मैंने पुछा कि अच्छा पहले मुझे यह बताओ कि अंत्याक्षरी खेलते कैसे हैं…फिर बच्चों ने उत्साह से बताया कि वो गाना गाते हैं और गाने के अंतिम अक्षर पर फिर कोई दूसरा गाता है और यह क्रमबद्ध चलता है। बच्चों को जानकारी थी इसलिए 
मैंने कहा कि चलो फिर हमसब मिल कर खेलते हैं अंत्याक्षरी। मेरी कक्षा में पहले से ही दो ग्रुप बंटे हुए थे- पहली कक्षा और दूसरी कक्षा। दोनों कक्षा के बच्चे एक दूसरे के आमने-सामने बैठे हुए थे। फिर मैंने कहा कि रूको मैं एबीसीडी बोलती हूं जिस समूह की ओर मैं जेड बोलकर रुकुंगी वो समूह अंत्याक्षरी की शुरुआत करेंगे। मैंने एबीसीडी बोलना शुरू किया जो कक्षा 2 पर आकर समाप्त हुई। कक्षा 2 के बच्चों ने गाना शुरू किया और फिर गाने की लाइन का जो अंतिम अक्षर आया उसके आधार पर पहली कक्षा के बच्चों ने गाना शुरू किया। बच्चे गा रहें थे पर दो-चार बच्चे ही बार-बार गा रहें थे। पर गाने के पंरपरागत तरीके पर आधारित यह अंत्याक्षरी बहुत जल्द ही समाप्त हो गई क्योंकि बच्चों के गाने का भंडार समाप्त हो गया था जिससे बच्चे उदास से हो गए।
बच्चों के अंत्याक्षरी खेलते वक्त का उत्साह देखकर मुझे भी कुछ सूझा। मैंने बच्चों से कहा कि देखो अभी तक आपने अपने तरीके से अंत्याक्षरी खेला। पर अब मैं एक और तरीका बताती हूं जिसमें बहुत मजा आएगा। अब हमलोग कविता वाली अंत्याक्षरी खेलेंगे। इसमें सबलोग अपने-अपने पसंद की कविताएं गाएंगे। तो चलो शुरू करते हैं कविताओं का खेल और देखते है कि दोनों समूह में से कौन सा समूह सबसे ज्यादा कविताएं सुनाते हैं। फिर क्या था बच्चों ने कविताएं गाना शुरू किया। एक बच्चा गाना शुरू करता तो उस समूह के सारे बच्चे एक साथ गाना शुरू कर देते। फिर इसी तरह से दूसरे समूह से कोई बच्चा गाना शुरू करता तो उस समूह के भी सारे बच्चे झूम-झूम के उस कविता को गाने लगते। इस तरह से एक-एक कर पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों ने एक-दूसरे को कई सारी कविताएं सुनाईं। यह देखकर सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था पर इसी बीच कविताओं का भी भंडार जल्दी ही समाप्त हो गया। 
अब बच्चों का ध्यान फिर से गर्मी-उमस से हो रही परेशानियों पर जाने लगा। पर मुझे बच्चों ने जो अंतर्बोध करवाया था मेरा मन उसी के आसपास भटक रहा था और सोच रही थी कि अब क्या किया जाए। तभी मन में विचार आया कि अरे! अंत्याक्षरी का खेल तो अंतिम अक्षर के साथ खेला जाता है फिर क्यों ना बच्चों को शब्दों के साथ अंत्याक्षरी की गतिविधि करवायी जाएं। क्योंकि इससे बच्चों में ना सिर्फ शब्दों का भंडार विकसित होगा बल्कि पहले और अंतिम अक्षर का प्रयोग करने से इनकी ध्वनि जागरुकता का बोध भी स्पष्ट होगा। मैंने उत्साहित होते हुए बच्चों की उर्जा को रिस्टोर करते हुए खनकती आवाज में कहा कि बच्चों अब हम एक और नये तरीके से अंत्याक्षरी खेलेंगे और इसे हम रोज थोड़ी देर खेलेंगे। बच्चे उत्साहित और आश्चर्य में भी थे कि अब कौन सा नया तरीका है। फिर मैंने बच्चों को कहा कि अब हम मिलकर शब्दों से अंत्याक्षरी खेलेंगे। मैंने बच्चों में शब्द की अवधारणा स्पष्ट करते हुए संक्षिप्त में कहा कि जैसे क अक्षर और ल अक्षर को मिलाकर कल शब्द बना जाता है,ज और ल को मिला कर के जल शब्द बन जाता है, यानी कि अक्षरों को जोड़ने से शब्द बनते हैं तो उसी तरह से हम जो कुछ भी बोलते हैं वो सबकुछ अक्षर और शब्दों का समूह ही होता है। चलो अब हमलोग शब्दों से अंत्याक्षरी खेलना शुरू करते हैं और इस बार की अंत्याक्षरी में जिस समूह को मदद की आवश्यकता होगी, उन्हें मैं मदद भी करुंगी। यह सुनकर बच्चे बहुत खुश हुए और अंत्याक्षरी की शुरुआत हुई। इस बार बच्चों ने ही एबीसीडी बोलना शुरू किया और फिर से जेड दूसरी कक्षा पर आकर रुका। मैंने बच्चों से कहा कि चलो इस बार पहला शब्द मैं अपना नाम बोलती हूं - प्रियंका और प्रियंका का अंतिम अक्षर क है। अब आप लोग क से बोलिए। कक्षा-2 में से प्रिंस ने बोल उठा क से कबूतर। मुझे यह सुनकर बहुत खुशी हुई और खुश होते हुए मैंने कहा कि बहुत बढ़िया क से कबूतर और कबूतर का अंतिम अक्षर र हैं तो अब पहली कक्षा वाले बोलेंगे र से एक शब्द। अब पहली कक्षा से रजनीश ने कहा कि र से राम, अब म से बोलो। इस तरह से बच्चे अब खुद अक्षरों का नाम लेकर शब्द बोलना शुरू कर दिए और बहुत ही चाव के साथ शब्दों की अंत्याक्षरी खेलने लगे।
इस दौरान मैंने गौर किया कि कुछ बच्चे बहुत सक्रिय थे तो कुछ कना-फूसी कर शब्दों को बता रहे थे तो कुछ बड़े ही गौर से सुन रहे थे। बस एक-दो बच्चों का ध्यान इधर-उधर था जिन्हें मैं बीच-बीच में टोक रही थी कि वो भी कुछ बोले या फिर जो बोला जा रहा है उसे अच्छे से सुनने का प्रयास करें। बच्चों के द्वारा बोले जा रहे शब्दों में किसी-किसी शब्द जो एक ही चीज होते थे, का नाम आने पर हम उसके बारे में भी कुछ चर्चाएं कर लेते रहे यथा ज से जल - प से पानी। मैंने बच्चों ‌से पुछा कि बच्चों जल समझते हो तो उन्होंने कहा कि हां,भोला बाबा (शिवलिंग) पर जो चढ़ाते हैं वो जल होता है और पानी के बारे में बच्चों ने बताया कि जो पीते हैं वो पानी होता है। मैंने बच्चों की बात में सहमति जताते हुए कहा कि हां,पर जल और पानी एक ही होता है ना,तो सभी बच्चे एक साथ बोल उठे - जी दीदी। फिर मैंने उन्हें बताया कि कई बार एक ही चीज को कई अलग-अलग नाम से बोलते हैं जैसे कि पानी को ही जल कहते हैं और पानी को ही अंग्रेजी भाषा में वाटर कहते हैं। इसी तरह से जब अ से आम बच्चों ने बोला तब हमने आम के रंग,स्वाद और बच्चों के पसंद के बारे में भी संक्षिप्त बातें की।
शब्दों की अंत्याक्षरी खेलते-खेलते संयोग से लाइट आ गई और तभी मैं जोर से बोली ल से लाइट, क्योंकि दूसरी कक्षा के बच्चे बार-बार पहली वालों को ल अक्षर से शब्द बोलने की चुनौती खड़ी कर दे रहे थे। ल से लाइट सुनकर सभी बच्चे ताली बजा कर हंसने लगे। सच में आज मेरे मन मस्तिष्क में मेरी शिक्षण प्रक्रिया से संबंधित एक और लाइट ऑन हो गई। मुझे अंत्याक्षरी के रूप में बच्चों ने एक बेहतर विकल्प दे दिया जो उनकी भाषा विकास, शब्द भंडार और ध्वनि जागरुकता को मजबूती से विकसित करने वाली है। शिक्षकों से बातचीत के दौरान मैंने पाया कि अंत्याक्षरी को वह तीसरी कक्षाओं से उपर अर्थात चौथी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए ही सहज व उपयुक्त मानते हैं। पहले मुझे भी ऐसा लगता था पर अब नहीं। इसलिए आप सभी शिक्षकों से मेरा यह अनुरोध है कि आप अपने विद्यालय हो या आंगनबाड़ी केंद्र, बुनियादी कक्षाओं के बच्चों के साथ अंत्याक्षरी की गतिविधि जरुर शुरू करवाएं। यह काफी मददगार साबित हो सकता है। शुरुआती दौर में भले ही कुछ बच्चों की ही सक्रिय भागीदारी मिले इस गतिविधि में, परंतु मुझे पूरा विश्वास है कि धीरे-धीरे बाकी बच्चे भी सुनते-सुनते और समझते हुए अपनी भागीदारी भी इस अंत्याक्षरी गतिविधि में दिखाएंगे और यह बच्चों के भाषा विकास में बहुत ही सहायक सिद्ध होगा। 
मैं यहां कुछ प्रतिफल साझा कर रही हूं जो मुझे पहली कक्षा में अंत्याक्षरी की गतिविधि करवाएं जाने के दौरान देखने को मिल रही हैं -
*  बच्चों में कुछ विशेष अक्षरों को लेकर भ्रम जिसपर कार्य करने की आवश्यकता यथा नदी के स्थान पर लदी बोलना,इसी प्रकार से च - स ,र - न, और द - ड आदि को लेकर अस्पष्टता।
* बच्चों में झिझक का टूटना।
* आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी।
* शब्द भंडार में वृद्धि।
* नये-नये शब्दों से परिचय।
* समूह भावना विकसित होना।
* ध्वनि जागरुकता।
*अक्षर और शब्द की समझ आदि।
             मैंने पहली कक्षा के बच्चों को तीसरी-चौथी कक्षा के कुछ बच्चों के साथ भी जब शब्दों की अंत्याक्षरी करवायी तथा पहली वालों को खूब उत्साहित किया बोलने के लिए, तब मैंने देखा कि पहली कक्षा के बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ इस प्रक्रिया में भाग लिया और वो काफी देर तक तीसरी-चौथी कक्षा वाले बच्चों के सामने टिके रहे। इस दृश्य ने पहली कक्षा के बच्चों के लिए अंत्याक्षरी गतिविधि नियमित रूप से करवाने की मेरी सोच को और अधिक दृढ़ता प्रदान की।
धन्यवाद मेरे प्यारे एवं मार्गदर्शक बच्चों।

प्रियंका कुमारी, शिक्षिका 
मध्य विद्यालय मलहाटोल, परिहार 
जिला - सीतामढ़ी, बिहार 
संपर्क - pkjha2209@gmail.com





Comments

  1. बहुत बढिया लिखा है मैडम आपने। छोटे बच्चों के लिए शब्दों की अंत्याक्षरी बहुत आकर्षक और उपयोगी होगी। बच्चों को मजा भी आएगा।
    - कमल

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद कमल सर।

    ReplyDelete

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