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सीखने के कोने/लर्निंग काॅर्नर

सीखने के कोने (Learning Corners)

इस आलेख के माध्यम से हम जानेंगे कि सीखने का कोना (Learning Corners) का क्या अर्थ होता है और इसका क्या महत्व है। साथ ही हम जानेंगे कि लर्निंग काॅर्नर क्यों आवश्यक है और इसे विद्यालय/कक्षा-कक्ष में विकसित करने हेतु हमें क्या-क्या करना चाहिए। 

लर्निंग काॅर्नर से हमारा तात्पर्य विद्यालय अथवा कक्षा-कक्ष में उपलब्ध/स्थित उन कोनों/क्षेत्रों से है जहां शिक्षण अधिगम सामग्री का संग्रह होता है। इन शिक्षण सामाग्रियों का उपयोग कर बच्चे सीखते हैं और उनमें विभिन्न शैक्षिक गुणों के विकास यथा - अवलोकन कौशल, सामाजिकता, संवेदनात्मकता, संज्ञानात्मक तथा शारीरिक विकास आदि में सहायक होता है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बुनियादी कक्षाओं में लर्निंग कार्नर विकसित करने पर बल दिया गया है। इसके कुछ मुख्य उद्देश्य है जो इस प्रकार है -
* बच्चों में सीखने के प्रति रुचि पैदा करना।
* बच्चों में अवलोकन कौशल विकसित करना।
* बच्चों के उत्साह को बरकरार रखना।
* कक्षा मे रचनात्मकता एवं सृजनात्मकता कायम करना
* बच्चों के संज्ञानात्मक, भावानात्मक एवं शारीरिक विकास।
* सहयोगात्मकता एवं समावेशन को बढ़ावा देने हेतु।

महत्व/आवश्यकता - 
कई शिक्षा मनोविज्ञानियों द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था को अन्वेषणात्मक अवस्था भी कहा गया है क्योंकि इस उम्र में बच्चों में अपने आस-पास की वस्तुएं चाहे वह सजीव हो या निर्जीव, के बारे में जानने की उत्सुकता काफी अधिक रहती है। बच्चे हमेशा अपने आस-पास की वस्तुओं को देखकर, हाथ में लेकर, उसे छू कर यह जानने की कोशिश करते हैं कि यह कैसे कार्य करता है या किस प्रकार से अन्य चीजों से या एक-दूसरे से संबंधित है। ऐसे में बुनियादी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कक्षा-कक्ष में अधिकाधिक शिक्षण अधिगम सामग्री की उपलब्धता उनके अनुभव और सीखने के स्तर में अभिवृद्धि की संभावना को संपुष्ट करते हैं। बच्चों के लिए ‘सीखने का कोना’ शिक्षण अधिगम सामग्री की उपलब्धता का स्थान सुनिश्चित करता है जहां आवश्यक शैक्षिक सामग्री और विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी चीजें होती हैं।
चूंकि बुनियादी कक्षाओं के बच्चों पर ग्रहणशीलता का सिद्धांत लागू होता है इसलिए प्रत्येक विद्यालय/कक्षा-कक्ष में बच्चों के लिए सीखने के कोने का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि बच्चे अपनी अनुभूतियों/अवलोकन के आधार पर अधिकाधिक अपने अनुभवों का निर्माण कर सकें। हम सब इस बात से परिचित हैं कि प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चे जितना अधिक अनुभव लेते हैं उनके सीखने और भविष्य में उनकी शिक्षा एवं जीवन कौशल पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। 
बच्चों के सर्वांगीण विकास में सीखने के कोने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों में खेल-खेल के माध्यम से सामाजिक सहयोग की भावना भी विकसित हो जाती है। टाॅय/आर्ट एंड क्राफ्ट काॅर्नर इसमें विशेष भूमिका निभाते हैं। बच्चे जब स्कूल में जाने वाले उम्र आते है तो उनकी रुचि खिलौने में कम होती जाती है परंतु इससे पूर्व उनकी खिलौने में बहुत रुचि होती हैं। खिलौनों के माध्यम से बच्चे बहुत तरह के अभिनय स्वयं करते हैं जिससे उनमें टीम भावना एवं सामाजिकता का स्वत: विकास होता चला जाता है। इसी प्रकार से आर्ट एंड क्राफ्ट काॅर्नर बच्चों की रचनात्मक एवं सृजनात्मक क्षमताओं में वृद्धि करता है जिससे बच्चे अपनी कल्पनाओं को एक आकार देते है। 
प्रक्रिया - 
बुनियादी कक्षाओं में लर्निंग कार्नर को विकसित करने के लिए यह आवश्यक है कि बच्चों की सीटिंग अरेंजमेंट को आवश्यकतानुसार संशोधित किया जाएं। सामान्यतः कक्षाओं का आकार आयताकार होता है और इसमें चार कोने उपलब्ध होते हैं। ऐसी स्थिति में इन चारों कोनों का उपयोग विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के संदर्भ में प्रयोग में लाया जा सकता है। कोनों की दीवार को बुनियादी शिक्षा के भिन्न-भिन्न आयामों के अंतर्गत व्यवस्थित रूप दिया जा सकता है।
*कक्षा का एक कोना विभिन्न सौफ्ट खिलौने के उपलब्धता के रूप में विकसित किया जा सकता है जहां बच्चे उन्हें छू कर एवं देखकर अपनी समझ विकसित कर सकें और अपनी भावानाओं को व्यक्त कर सकें।
*कक्षा का दूसरा कोना बच्चों द्वारा बनाई गई विभिन्न drawing/ पेंटिंग/क्राफ्ट्स से संबंधित हो सकती है जहां बच्चे अपनी बनायी चीजें देख सके और स्वयं में आत्मविश्वास और गर्व का अनुभव कर सकें। साथ ही स्वयं को कक्षा से संबंध स्थापित कर सके।
*कक्षा का तीसरा कोना विभिन्न टीएलएम से भरा-पूरा हो सकता हैं जहां रेडीमेड के अतिरिक्त शिक्षकों द्वारा बनाएं गए शून्य निवेश नवाचार या अन्य आकर्षक और उपयोगी शिक्षण अधिगम सामग्रियां उपलब्ध हो जिसके प्रति बच्चों में उत्सुकता हो।
*कक्षा में चौथा कोना रीडिंग कार्नर के रूप में विकसित किया जा सकता है जहां बच्चों के लिए रंग-बिरंगी चित्रों वाली किताबें उपलब्ध हो जिससे बच्चों में किताबों के प्रति उत्सुकता और आकर्षण जागृत हो।
                        इन चारों कोनों के अतिरिक्त बुनियादी कक्षाओं में कक्षा के निचली दीवारों का उपयोग राइटिंग कार्नर के रूप में विकसित किया जा सकता है जिसके अंतर्गत पूरी कक्षा की निचली दीवारों को काले रंग से पेंट करवा कर ब्लैक बोर्ड के रूप में उपयोग किया जा सकता है जहां बच्चे स्वतंत्र रूप में कुछ भी लिख सकें।

 नई शिक्षा नीति में फाउंडेशनल स्टेज में संवादात्मक कक्षा शैली के जरिए अध्ययन-अध्यापन की बात की गई है तो हम लर्निंग काॅर्नर के तौर पर एक कोना अभिव्यक्ति कोना नाम से भी विकसित कर सकते हैं जहां बच्चे अपने आप को अभिव्यक्त कर सके।गीत , नृत्य, कविता,कहानी, चुटकुले या अपने अनुभवों/समस्याओं/इच्छाओं को अभिव्यक्ति कोने के माध्यम से बच्चे अभिव्यक्त कर सकें। कुल मिलाकर हम यह कर सकते हैं कि शिक्षक बच्चों की शैक्षिक/अधिगम आवश्यकताओं, उनके परिवेश,उनकी रुचि,उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप भी सीखने के कोनों को विकसित कर सकते हैं।

नोट
लर्निंग काॅर्नर बनाने की प्रक्रिया के दौरान हमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CSWN) को भी ध्यान में रखना होगा ताकि उनके मन में भी किसी भी प्रकार का असुरक्षित या अपेक्षित भाव का बोध ना हो। कक्षा का माहौल या शिक्षण अधिगम सामग्री तक बच्चों की पहुंच समावेशन के सिद्धांतों के अनुकूल हो। हर बच्चे को सीखने का समान अवसर उपलब्ध हो।

समेकन/सारांश - 

निष्कर्षत: हम कह सकते हैं कि सीखने का कोना बच्चों के शिक्षण प्रक्रिया में सहायक होने के साथ-साथ यह उनके अंदर की क्षमताओं को बाहर निकालने का सकारात्मक वातावरण उपलब्ध करवाता है।प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चे एक विशिष्ट व्यक्तित्व विकसित करते हैं और स्वतंत्र रूप से कार्य करने पर बल देते हैं। साथ ही इनमें अनुकरण की प्रवृत्ति भी उच्च स्तर पर होती है तथा वे अपने परिवेश की सभी वस्तुओं को जानने के प्रति अत्यंत उत्सुक होते हैं, ऐसी स्थिति में लर्निंग काॅर्नर उनके लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं।
हमें अपने विद्यालय में उपलब्ध शिक्षण अधिगम सामग्री की सहायता से सीखने के कोने को बच्चों के लिए आकर्षक, रुचिकर और साधन संपन्न बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त बच्चों के साथ की गई गतिविधियों के माध्यम से अथवा बच्चों की सहायता से निर्मित स्थानिक शिक्षण अधिगम सामग्रियों के प्रयोग से भी कक्षा-कक्ष के कोनों को सुसज्जित किया जाना चाहिए ताकि बच्चों के सीखने के लिए एक सकारात्मक और रुचिकर वातावरण सृजित किया जा सके। 




धन्यवाद।

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