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समग्र प्रगति पत्रक (Holistic Progress Card)


समग्र प्रगति पत्रक बच्चों की शैक्षिक एवं सह शैक्षिक विकासात्मक प्रगति का एक दस्तावेज होता है जो विद्यालय आधारित आकलन एवं विश्लेषण के आधार पर तैयार किया जाता है। इस दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक, छात्र, अभिभावक सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके निर्माण का आधार सिर्फ योगात्मक आकलन ना हो कर निर्माणात्मक आकलन भी होता है क्योंकि यह बच्चों की आकादमिक प्रदर्शन के साथ-साथ जीवन कौशल की क्षमता का भी आकलन करता है। इस प्रगति पत्रक में ‘सीखने के आकलन’ के साथ-साथ ‘सीखने के लिए आकलन’ की प्रक्रिया का भी उल्लेख होता है जो बच्चों के प्रभावी सीखने और प्रगति करने में सहयोग प्रदान करता है।बच्चों का प्रगति पत्रक शिक्षकों के लिए एक मार्गदर्शिका के समान है जिसके आधार पर वह बच्चों के शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक शैक्षिक कार्य योजनाएं बना सकते हैं।
इस तरह से हम कह सकते हैं कि समग्र प्रगति कार्ड एक 360 डिग्री, प्रगति की बहुआयामी रिपोर्ट है, जो संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और साइकोमोटर डोमेन में प्रत्येक बच्चे की प्रगति के साथ-साथ उसकी विशिष्टता को भी विस्तार से दर्शाती है। नई शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.35 में अंकित किया गया है कि स्कूल आधारित आकलन के आधार पर तैयार किए जाने वाले बच्चों के प्रगति कार्ड को आमूल-चूल परिवर्तन के साथ एक नया स्वरूप दिया जाएगा जिसके फलस्वरूप एक ऐसा 360 डिग्री, बहुआयामी समग्र प्रगति कार्ड तैयार होगा जो प्रत्येक विधार्थी के संज्ञानात्मक, भावानात्मक,साइकोमोटर डोमेन में विकास का बारीकी से किए गए विश्लेषण का विस्तृत विवरण, विधार्थियों के विशिष्टताओं को इंगित करेगा।
इस क्रम में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर स्कूल आधारित आकलन के अंतर्गत समग्र प्रगति कार्ड (Holistic Progress Card) का निर्माण किया गया है। इन समग्र प्रगति पत्रक में बच्चों के 360 डिग्री आकलन की व्यवस्था की गई है जो शिक्षक, अभिभावक और सहपाठी के साथ-साथ बच्चों के स्व आकलन का दस्तावेज होगा। 
इस संदर्भ में हमारे राज्य बिहार में भी समग्र प्रगति कार्ड को फांउडेशनल एज ग्रुप/ बुनियादी कक्षाओं के लिए तैयार कर लिया गया है। तैयार प्रगति पत्रक का पहला पृष्ठ अकादमिक वर्ष की शुरुआत में शिक्षक/शिक्षिका द्वारा भरा जाना है जिसमें बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य को आधार बनाकर कालम बनाएं गए हैं ताकि एक शिक्षक को अपने बच्चों की पूर्ण जानकारी हो जिसके आधार पर बच्चों को शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके या फिर शिक्षक बच्चे के लिए बेहतर कार्य योजना बना सके। समग्र प्रगति पत्रक को चार खंडों में बांटा गया है। प्रत्येक खंड में शिक्षक प्रत्येक आकलन बिंदु के सामने बीते तीन महीनों में बच्चे के सीखने की प्रगति को अंकित करेंगे। विभिन्न खंडों के आकलन बिंदुओं को भरने के लिए शिक्षक शिक्षक संदर्शिका में दिए मासिक रिकार्ड, अर्धवार्षिक और वार्षिक मूल्यांकन के आंकड़े, अन्य विषयों के शिक्षकों का परामर्श, अभिभावकों द्वारा बातचीत आदि को आधार बनाकर कार्य करेंगे। साथ ही इस समग्र प्रगति पत्रक में प्रगति संकेतकों को को भी एक नवाचारी तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है जैसे ग्रेड A एवं B को वृक्ष,ग्रेड C एवं D को पौधा तथा ग्रेड E को बीज के रूप में दर्ज करने की बात कही गई है।प्रगति पत्रक के दिशा-निर्देश के अनुसार समग्र प्रगति पत्रक को प्रत्येक सत्र के अंत में बच्चों और शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों के साथ साझा करने की बात कही गई है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है समग्र प्रगति पत्रक बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। यह अभिभावकों को बच्चों की प्रगति से अवगत कराते रहने के साथ साथ शिक्षकों को भी बच्चों की सीखने संबंधी आवश्यकताओं के संबंध में अपडेट करती रहेगी। नये सत्र में बिहार के सभी विद्यालयों में कक्षा-1,2 और 3 के बच्चों के विकासात्मक आकलन एवं विश्लेषण हेतु समग्र प्रगति पत्रक उपलब्ध करवायी जा रही है। बच्चों के आकलन के क्षेत्र में यह एक उल्लेखनीय प्रयास है। इस समग्र प्रगति पत्रक को तैयार करने में राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के साथ आईपीएल( India Partnership for Early Learning) टीम ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
धन्यवाद।
प्रियंका कुमारी
राजकीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल, परिहार, सीतामढ़ी
ईमेल - pkjha2209@gmail.com

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