Skip to main content

मिट्टी से बनाएं टीएलएम (शैक्षिक आलेख)

निपुण भारत अभियान के अंतर्गत बच्चों को भाषा और गणित में समझ के साथ सीखने की दिशा में जोर-शोर से विभिन्न कार्यक्रम व कार्यशालाएं आयोजित किए जा रहे है। बच्चों को निपुण बनाने की दिशा में हम शिक्षक भी आए दिन नित नए-नए प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों की श्रृंखला में अपना एक नवीन अनुभव यहां साझा कर रही हूं।

मिट्टी से बनाएं टीएलएम

हम अक्सर शिक्षा में शून्य निवेश टीएलएम एवं नवाचार के प्रयोग की बात करते हैं। इस क्रम में आइए मिट्टी से बने रंग-बिरंगे टीएलएम के बारे में जानते हैं जिससे भाषा और गणित विषय की प्रारंभिक समझ बच्चों में अच्छे से विकसित की जा सकती है। निपुण भारत के उद्देश्य की प्राप्ति में भी यह मिट्टी की टीएलएम काफी सहयोगी साबित हो सकती है। खासकर फांउडेशनल एज ग्रुप के बच्चों को संख्याज्ञान के अंतर्गत गिनना, जोड़ना,घटाना खेल-खेल में सिखाया जा सकता है। साथ ही भाषा के अंतर्गत अक्षरों का ज्ञान बच्चों को आसानी से करवाया जा सकता है।
*मिट्टी की गोलियां - बच्चों को कंचे/गोलियों से खेलना बहुत पसंद होता है। ऐसे में बच्चों को एक होमवर्क दिया कि कल सभी लोग मिट्टी की पांच गोलियां बना कर लाएंगे। यह सुनकर सभी बच्चे खुशी से झूम उठे। चूंकि यह कार्य पहली और दूसरी कक्षा में बच्चों को बोला गया था पर आश्चर्य कि सभी कक्षा के बच्चों ने पांच-पांच मिट्टी की गोलियां बनाकर लाएं।इस तरह हमारे पास मिट्टी की 200 से अधिक गोलियां जमा हो गई। जिनमें से लगभग 100 गोलियां हमने अलग-अलग रंगों से रंग कर अलग रखी। गोलियों को रंगने में भी बच्चों ने अपना सहयोग प्रदान किया। इस प्रकार हमारा पहला टीएलएम बच्चों को गिनती सीखाने के लिए तैयार हुआ। सादी गोलियों की मदद से बच्चों ने 1 से 100 तक की गिनती का अभ्यास शुरू किया। बच्चों को मिट्टी की गोलियों से गिनती करने में बहुत आनंद आ रहा था।जब एक बच्चा गिनती करता तो बाकी सभी बच्चे गौर से सुनते रहते और जहां कही भी गिनती में गलती होती तो बच्चे टोक पड़ते।
*मिट्टी की गणितीय डाइस - गिनती के बाद हमने जोड़ और घटाव के लिए गणितीय डाइस बनाई। इसमें तीन डाइस बनायी गई एक छोटी और दो बड़ी आकार की। छोटे डाइस में हमने जोड़ और घटाव के गणितीय चिह्न का आकार बनाया। बाकी दो डाइस में 1 से 6 तक के अंक और दूसरे में 7 से 12 तक संख्या लिखी। इससे जोड़ और घटाव की क्रिया खेल-खेल में बच्चे कर पाते हैं। जैसे - 
अब इन तीनों डाइस को एक साथ फेंकते हैं और देखते हैं कि किस डाइस के उपर क्या लिखा है। मान लेते हैं कि अंक वाले डाइस में एक में 5 लिखा है और दूसरे में 8 लिखा है तथा गणितीय चिह्न वाले डाइस में जोड़ का चिह्न है तो इसे क्रम से सजा दिया जाता है 5+8 । इसके बाद जो रंगीन गोलियां बनाई गई है उसका उपयोग किया जाता है। अगर 5 अंक वाले डाइस का रंग हरा है तो हरे रंग की पांच गोली डब्बे में से उठा कर एक जगह रखी जाती है और फिर 8 अंक वाले डाइस का रंग पीला है तो पीले रंग की आठ गोलियां एक जगह रखी जाती है। फिर दोनों रंग के गोलियों को एक साथ मिलाकर गिना जाता है जिससे बच्चे इस निष्कर्ष पर पहुंच पाते हैं कि 5 और 8 का एक साथ जोड़ने पर 13 होता है।
इसी प्रकार से जब गणितीय डाइस का यह खेल पुन: खेला जाता है तब अगर घटाव का चि‌ह्न आता है तो सिर्फ बड़े अंक की रंगीन गोलियां निकाली जाती है और जितने अंक घटाना होता है उतनी गोलियां उसमें से गिन कर हटा ली जाती है और शेष बची गोलियों को गिन कर उत्तर प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया में बच्चों का उत्साह अपनी चरम सीमा पर होती है क्योंकि यह गणितीय खेल उन्हें लुडो के खेल जैसा प्रतीत होता है। जोड़ने, घटाने के साथ साथ बच्चों में गणितीय चिह्न की समझ भी विकसित होती है।
*अल्फाबेटिकल डाइस - मिट्टी के टीएलएम बनाने के क्रम में हमने अल्फाबेटिकल डाइस भी बनाया जिस पर एबीसीडी के अक्षर अंकित थे। इस डाइस के उपयोग के लिए सादे पेपर पर दाहिनी ओर सारे अल्फाबेट्स क्रम से लिख दिए गए थे और बायीं ओर शतरंज की बोर्ड की तरह चौकोर खाने बनाएं गए थे जिसमें बेतरतीब तरीके से अल्फाबेट्स के क्रम को लिखा गया था। अब बच्चे डाइस को फेंकते और जो भी अंग्रेजी का अक्षर आता उसे खोजकर उच्चारण के साथ संबंधित खाने में डाइस को रख देते। पुनः अल्फाबेटिकल डाइस को फेंकते और जब जो अक्षर आता उसका उच्चारण करते हुए संबंधित खाने में डाइस को रखते। जैसे कि डाइस फेंकने पर डी आएं तो बच्चे जहां डी लिखा होता उस खाने में डी बोलते हुए डाइस को रखते। इससे बाकी बच्चों में भी अल्फाबेट्स की समझ विकसित होती है। इस क्रिया में भी बच्चे बहुत आनंद के साथ भाग लेते हैं।
                          उपरोक्त टीएलएम की आवश्यकता कहिए या फिर प्रेरणा मुझे पहली कक्षा की एक बच्ची नंदिनी के कारण महसूस हुई।कुछ दिन पूर्व की बात है। पहली कक्षा में बच्चों को गणित की वर्कबुक से कार्य करवा रही थी। कार्य से पूर्व बच्चों को पहले समझाया कि देखों इसमें कुछ वस्तुओं का चित्र दिया गया है जिन्हें गिनना है और गिनती करने के बाद सही अंक में गोल घेरा बनाना है। बच्चों ने बड़े आराम से गिनती करना और दिए गए तीन विकल्प में से एक विकल्प (अंक) में गोल घेरा करना शुरू किया। इसी क्रम में मेरी नजर नंदिनी की वर्कबुक पर गई (नंदिनी एक से दस तक की गिनती बहुत ही सुन्दरता के साथ लिखना और बोलना जानती है) जो कि गलत विकल्प में गोल घेरा लगा रही थी। मैंने उससे गिनवाया और फिर बोला कि बताओ छह कौन सा है तो वह पुनः सात के बारे में इंगित करने लगी। यह देखकर मैं ठहर सी गई। मैंने तुरंत इस तथ्य की जांच कुछ और बच्चों के संबंध में भी की और फिर मुझे महसूस हुआ कि कहीं न कहीं भयंकर चूक हुई है जिसपर तत्काल कार्य करने की आवश्यकता है।
फिर बिना एक पल गंवाए फर्श पर ही मैंने 1 से 10 तक की गिनती लिखी और हर अंक के सामने उसके बराबर मिट्टी से बनी सादी और रंगीन गोलियां रखी ताकि बच्चे जब गोलियों की गिनती करें तब उस के बराबर में वो अंक दिखाई दे जो उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। सबसे पहले नंदिनी अपनी काॅपी-पेंसिल लेकर आयी और उसने गोलियों की गिनती कर कर के सामने लिखे अंकों को नोट करना शुरू किया। इसी तरह से अन्य बच्चों ने भी किया। इसके बाद बच्चों ने अपने वर्कबुक में सही विकल्प में निशान लगाएं।
और इस तरह से मुझे मिट्टी की गोलियों के साथ साथ अल्फाबेटिकल डाइस और गणितीय डाइस बनाने की प्रेरणा मिली जिसने बच्चों के अंदर स्पष्ट समझ को विकसित करने में सहयोग किया।



Comments

Popular posts from this blog

अभिभावकों और बच्चों का एक साथ सीखना

दृश्य -1 साक्षी के दादाजी उसकी कक्षा में बैठकर उसके सभी सहपाठियों के बीच कहानी सुना रहे है और वो मन ही मन गर्वीली सी मुस्कान लिए सबके साथ कहानी सुन रही है। दृश्य -2 आदित्य अपनी दादी के साथ बैठकर एक सादे पेज पर कलर पेन्सिलों के साथ ड्राइंग कर रहा है। उसकी दादी और वो दोनों एक ही समय में एक ही पेज पर ड्राइंग कर रहे है और आपस में बातचीत भी कर रहे है। दृश्य -3 महिमा अपने घर के आंगन में अन्य भाई-बहनों के साथ मां के निकट बैठी है और उसकी कक्षा की शिक्षिका उसकी मां से उन्हीं की भाषा में बात कर रही है और बता रही है कि एक शिक्षक और अभिभावक साथ में मिलकर काम करें तो बच्चों का सर्वांगीण विकास कितना सरल हो जाएगा। साथ ही वो अपने बुनियादी कक्षाओं के बच्चों की शिक्षा में कैसे अपना सहयोग दे सकती है। दृश्य -4 स्कूटी से जा रही शिक्षिका रास्ते में रुक कर खेतों से घास के भारी-भरकम गट्ठर सर पर लिए जा रही महिलाओं को रोककर और उनके गट्ठर नीचे रखवाकर पेड़ की छांव में बैठकर उन्हें अपने पोते-पोतियों को रात में सोते समय कोई कहानी या अनुभव सुनाने की बात करती है और उनकी कविता -कहानी से बच्चों के शिक्षण पर...

टीचर ऑफ़ द मंथ : एक सराहनीय पहल

हैलो, मैं न्यूज 18 चैनल से बोल रहा हूं। एसीएस सर द्वारा बिहार के 12 शिक्षकों को टीचर औफ द मंथ अवार्ड् दिया गया है जिसमें आपका भी नाम है। बधाई हो। हम आप का बाइट लेना चाह रहे है। क्या आप अभी विद्यालय में है... चूंकि मैं उस समय डायट डुमरा, सीतामढ़ी में दीक्षा पोर्टल पर कोर्स लांच करने की तकनीकी प्रक्रियाओं को अपने लैपटॉप पर संपादित कर रही थी इसलिए मैंने उन्हें कहा कि आप से कुछ देर बाद बात करती हूं और मुझे इस अवार्ड की कोई सूचना नहीं मिली है। इसलिए आप मुझे इस से संबंधित कोई जानकारी है तो मेरे नंबर पर साझा कर दीजिए। कार्य की व्यस्तता अधिक थी फिर भी इस खबर को सुनकर प्रसन्नता हुई। इसलिए दो मिनट रुक कर मैंने जब अपना मोबाइल चेक किया तो देखा कि बधाई देने वाले और न्यूज लेने वालों के काॅल्स और मैसेज का अंबार लगा था। मुझे हंसी भी आई कि मुझे छोड़ कर सबको खबर हो चुकी थी कि मैं टीचर औफ द मंथ बन चुकी हूं। फिर अपने परिजनों को इस संबंध में एक मैसेज कर मैं अपने कार्य में और उत्साह के साथ व्यस्त हो गई। कोर्स लांच में जिला शिक्षा पदाधिकारी सीतामढ़ी का भी आगमन हुआ और उन्होंने भी बधाईयां दी। साथ ह...

निपुण अभिभावक निपुण बच्चे

निपुण अभिभावक निपुण बच्चे ********************************* इस आलेख के माध्यम से आप जानेंगे कि अगर हमें बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करवानी है तो बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी निपुण बनाने में अपना सहयोग देना होगा। साथ ही अभिभावकों के लिए ऐसे अवसरों का भी सृजन करना होगा जिसमें वह बच्चों के हित में अपनी भागीदारी दे सकें। मैंने निपुण अभिभावक निपुण बच्चे नवाचार का प्रयोग कर अभिभावकों के लिए एक अवसर उपलब्ध करवाने की कोशिश की है जिसके माध्यम से वो बच्चों की शिक्षा में सहभागी बन सकें। किसी भी बच्चे के लिए परिवार प्रथम पाठशाला तथा माता-पिता/अभिभावक प्रथम शिक्षक होते हैं। बच्चे जब पहली बार विद्यालय आते हैं तो उस समय भी उनके पास बहुत सा ज्ञान और अनुभव होता है । वैसे तो बच्चों की शिक्षा में पूर्व में भी परिवार की भागीदारी के महत्व को स्वीकार किया गया है पर नई शिक्षा नीति 2020 में अभिभावकों एवं समुदाय की शिक्षा में सहभागिता पर विशेष बल देने की बात की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी शिक्षा में अभिभावकों की सहभागिता से संबंधित डा...