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रेलवे स्टेशन पर मेडिकल स्टोर की उपलब्धता

हम और आप में से सभी ने कभी ना कभी रेल से सफर जरूर किया होगा। पर याद कर के बताइए क्या कभी किसी रेलवे स्टेशन पर किसी मेडिकल स्टोर या कॉर्नर पर आपकी नजर गई हो। नही याद आ रहा न…! 
सामान्यतः रेलवे स्टेशन पर खाने-पीने,पत्र -पत्रिकाओं, खिलौने आदि से जुड़े स्टॉल की भरमार आपको देखने को मिल जाती है। पर जीवन की आवश्यक बुनियादी सुविधाओं में वायु,जल एवं भोजन के साथ-साथ दवाओं का भी उतना ही महत्व शामिल हो गया है । ऐसे तो रेलवे का सफर शरीर के लिए सुविधाजनक और पाॅकेट के लिए ही किफायती भी होता है । पर यह सुखद यात्रा तब एक त्रासदी बन सकती है जब हमारे स्वास्थ्य में अचानक ही कोई गड़बड़ी महसूस होने लगे। ऐसे में तत्काल दवाओं की उपलब्धता की आवश्यकता महसूस होती है। बहुत सारे लोग अपनी बीमारी या संभावित स्वास्थ्य परेशानियों के हिसाब से दवाएं लेकर चलते है परंतु अधिकांश लोग ऐसा नही कर पाते है। खासकर गरीब व अशिक्षित तबके के लोग। ऐसे में यह नितांत आवश्यक हो जाता है कि रेलवे स्टेशनों पर पर कम से कम एक मेडिकल स्टोर की उपलब्धता अवश्य सुनिश्चित की जाएं ताकि विषम स्वास्थ्य परिस्थितियों या छोटी-मोटी समस्याओं को समय पर ठीक किया जा सके।
यह बहुत ही हैरानी का विषय है कि आज तक इस संदर्भ में कोई खास पहल नही की गई है और ना ही इस पर कभी गंभीर चर्चाएं चली है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में एक सराहनीय फैसला लिया गया है और वो ये है कि देश के रेलवे स्टेशनों पर पर जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। बता दे कि वर्ष 2008 में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत की गई थी। जन औषधि केंद्रों पर बहुत ही सस्ते मूल्य पर दवाएं उपलब्ध होती है। प्रथम चरण में 21 राज्यों के 50 स्टेशनों पर पर यह केंद्र खुलेंगे जो कि एक छोटी संख्या है क्योंकि हमारे देश में लगभग 7300 से अधिक रेलवे स्टेशन है।
ऐसे में रेलवे प्रशासन को अपने स्तर से पहल किए जाने की आवश्यकता है। स्थानीय मेडिकल आपूर्तिकर्ताओं के सहयोग से हर रेलवे स्टेशन पर एक मेडिकल स्टोर या कॉर्नर की स्थापना की जानी चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर यात्री स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें तथा उन्हें अपने सामान या परिवार के सदस्यों को छोड़ स्टेशन कैम्पस से बाहर दवाओं के लिए भटकना नही पड़े। साथ ही भारतीय रेल प्रबंधन भी यह गर्व के साथ कह सके कि आप की यात्रा सुरक्षित ही नही स्वास्थ्यकर भी रहे।

धन्यवाद।

प्रियंका कुमारी, शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल, परिहार, सीतामढ़ी

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