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नई शिक्षा नीति -2020 के संदर्भ में ECCE और TEIs की बदलती जिम्मेदारियां


नई शिक्षा नीति -2020 के संदर्भ में ECCE और TEIs की बदलती जिम्मेदारियां

ईसीसीई का शाब्दिक अर्थ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा है। ईसीसीई पॉलिसी-2013, नई शिक्षा नीति 2020 तथा निपुण निर्देशिका के आलोक में ईसीसीई के अंतर्गत जीवन के प्रारंभिक वर्षों से लेकर 8 वर्ष तक के बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया है क्योंकि जीवन के बेहतर निर्माण के लिए 0 से 8 वर्ष की अवस्था अधिक महत्वपूर्ण है। इस आयु वर्ग के बच्चों का मानसिक एवं शारीरिक विकास सबसे तीव्र गति से होता है साथ ही बच्चों का 80 से 90% बौद्धिक व शारीरिक विकास जीवन के शुरुआती 0 से 6 साल में हो जाता है जिसका स्थाई प्रभाव बच्चों के जीवन के विकास एवं शिक्षण पर होता है। ईसीसीई के अंतर्गत नई शिक्षा नीति -2020 के आलोक में एनसीईआरटी द्वारा 8 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों के लिए दो भागों में प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा के लिए एक उत्कृष्ट पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित किए जाने पर कार्य किया जा रहा है जिसमें 0-3 वर्ष के बच्चों के लिए एक सब फ्रेमवर्क और 3-8 साल के लिए एक अन्य सब फ्रेमवर्क का निर्माण किया जा रहा है।
अभी तक भारत में ईसीसीई कार्यक्रम को पूर्णतया महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा देश के सभी राज्यों में चलाया जा रहा था। परंतु नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ECCE को स्कूली शिक्षा से जोड़ नए शैक्षणिक ढांचे 5+3+3+4 में 3 वर्ष के बच्चों को शामिल कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा कि एक मजबूत बुनियाद को शामिल किया गया है जिससे आगे चलकर बच्चों का विकास बेहतर हो और वो बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सके और खुशहाल हो। इस क्रम में राज्य अंतर्गत शिक्षक शिक्षा संस्थान यथा SCERT/DIET/PTEC/BITE आदि की भूमिका ईसीसीई के सफलतापूर्वक संचालन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। ECCE के सफलतापूर्वक संचालन एवं क्रियान्वयन में शिक्षक शिक्षा संस्थानों के दायित्वों को निम्नांकित बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है -
एनसीईआरटी के द्वारा ईसीसीई के लिए उत्कृष्ट पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित किया जाना है जिसमें शिक्षक शिक्षा संस्थानों की भूमिका अहम होगी क्योंकि राज्य स्तरीय ईसीसीई पाठ्यक्रम के पाठ्यचर्या एवं रूपरेखा का निर्माण शैक्षिक संस्थानों की मदद से ही किया जा सकता है।
ईसीसीई प्रशिक्षित शिक्षकों का एक कैडर तैयार किया जाना है जो कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री/ प्राथमिक शिक्षक होंगे। इनके प्रशिक्षण और क्षमता वर्धन एनसीईआरटी द्वारा विकसित पाठ्यक्रम/शिक्षण शास्त्रीय फ्रेमवर्क के अनुसार व्यवस्थित तरीके से किया जाना है जो कि शैक्षिक संस्थानों की मदद से सफलतापूर्वक किया जा सकता है और इस दिशा में शिक्षक शिक्षा संस्थानों द्वारा कार्य किया भी जा रहा है।
ईसीसीई गतिविधियों के सफल संचालन हेतु शिक्षा विभाग के क्लस्टर रिसोर्स सेंटर और शिक्षक शिक्षा संस्थान द्वारा मासिक समीक्षात्मक बैठकों द्वारा मूल्यांकन एवं पर्यवेक्षण कार्य संपादित किया जा सकेगा।
शिक्षक शिक्षा संस्थानों द्वारा शिक्षकों को मेंटरिंग के लिए तैयार किया जाना भी एक महत्वपूर्ण दायित्व है ।
 इस तरह से नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शिक्षक शिक्षा संस्थानों की भूमिका विस्तृत हो गई है। ये संस्थान अब सिर्फ भविष्य के शिक्षक तैयार करने के केन्द्र बनकर नहीं रहेंगे बल्कि स्कूली शिक्षा के दायरे में आए ईसीसीई कार्यक्रम को भी प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर निरंतर काम करेंगे।


प्रियंका कुमारी
शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल
प्रखंड - परिहार
जिला - सीतामढ़ी


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