पाठ्य पुस्तकों में उपलब्ध QR कोड और अंतर्निहित शैक्षिक सामग्री का समीक्षात्मक अध्ययन।
************************************************
विषय - EVS , कक्षा - 05
दिनांक - 28 /10 /2021
पाठ्य पुस्तकों दिए गए QR कोड कितने उपयोगी है अथवा QR कोड को स्कैन करने के पश्चात जो शैक्षिक सामग्री उपलब्ध हो पाती है वह कितनी प्रासंगिक है, इसी तथ्य के जांच के क्रम मे मैंने बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा जारी 5वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तिका 'पर्यावरण और हम' में दिए गए क्यू आर कोड की उपयोगिता/प्रसांगिकता की जांच दस अध्यायों के QR कोड को स्कैन कर की। जिसके परिणामस्वरूप हमें यह ज्ञात हुआ कि इन क्यूआर कोड में उपलब्ध सामग्री सभी अध्यायों की आवश्यकताओं को उस रूप में पूर्ण नहीं कर पा रही है जिस रूप में इसे किया जाना चाहिए। कहने का तात्पर्य है यह है कि कुछ आवश्यक संशोधन और नई सामग्री जोड़ने के साथ-साथ कुछ आवश्यक सावधानियां भी बरतनी होंगे ताकि क्यूआर कोड की सार्थकता कायम हो। आइए नीचे दिए कुछ अध्यायों के अध्ययन पर नजर डालते हैं-----
*अध्याय -1 , 'पटना से नाथुला की यात्रा' के क्यूआर कोड को स्कैन करने के पश्चात हमें दीक्षा पोर्टल के माध्यम से इस पाठ का टेक्स्ट पीडीएफ के रूप में देखने को मिलता है। किसी भी प्रकार के ऑडियो-वीडियो कंटेंट उपलब्ध नहीं है। कोड स्कैन कर सिर्फ टेक्स्ट पीडीएफ प्राप्त करना जो कि पहले से ही हार्ड कॉपी में हमारे पास मौजूद है, तो वैसी सामग्री हमारे बच्चों के लिए कोई महत्व नहीं रख सकती। चूंकि यह पाठ एक महत्वपूर्ण पाठ है जिसमें एक साथ विभिन्न स्थानों, मौसम, पहाड़ों, पशुओं, संस्कृति आदि कई अन्य महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बताया जा रहा है और इन सारी चीजों की एक स्पष्ट समझ विकसित करने के लिए वीडियो कंटेंट की आवश्यकता है जो इस क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध होनी चाहिए थी।
संक्षिप्त शब्दों में कहा जाए तो इस महत्वपूर्ण अध्याय को एक वर्चुअल ट्रिप या सिमुलेशन तकनीक के द्वारा दिखाए जाने की आवश्यकता है।
*अध्याय - 2, 'खेल' - इसमें दिया गया क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो रहा है। पांच अलग-अलग मोबाइल से हमने क्यूआर कोड को स्कैन कर e-content तक पहुंचने की कोशिश की। परंतु यह कार्य नहीं कर रहा। इस की प्रबल संभावना है कि क्यूआर कोड की प्रिंटिंग सही नहीं होने के कारण यह कोड स्कैन नहीं हो पा रहा हो। इसलिए हमें क्यूआर कोड के प्रिंटिंग पर भी आवश्यक ध्यान देना होगा ताकि इस प्रकार की समस्याएं ना आए।
* अध्याय- 3, 'बीजों का बिखरना'- इस पाठ के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर 0 5 ई-सामग्री देखने को मिलती हैं जिसमें एक पीडीएफ जो कि संबंधित पाठ का टेक्स्ट है और 4 वीडियो हैं जो बहुत हद तक संबंधित पाठ की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। परंतु वीडियो की अवधि काफी लंबी है और पूर्णतया संबंधित अध्याय के अनुसार चित्रित नहीं है। फिर भी यह वीडियो इस पाठ के लिए उपयोगी कहे जा सकते हैं। सभी वीडियो बीजों से संबंधित हैं। इन वीडियो में बीज से पौधा बनने की प्रक्रिया , बीजों का प्रसारण-संरक्षण, पौधों में प्रजनन, खेती में बदलाव, खाद-पानी की कमी, खेती की तकनीक आदि से संबंधित पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।
*अध्याय- 4 , 'मेरा बगीचा' के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर एक टेक्स्ट पीडीएफ ही पढ़ने को मिलता है। कोई ऑडियो वीडियो सामग्री उपलब्ध नहीं है। यह पाठ भी एक रोचक पाठ है जिसमें स्थानांतरण, पक्षियों एवं विभिन्न आकार के पौधों, पत्तियों की बातें हैं जो वीडियो कंटेंट के माध्यम से रोचक पूर्ण तरीके से बच्चों के बीच साझा की जा सकती थी। वैसे इस पाठ के लिए हम अपने परिवेश से उदाहरण/सामग्री संग्रहित कर सकते हैं।
*अध्याय -5, 'ऐतिहासिक स्मारक' के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर एक टेक्स्ट पीडीएफ और एक वीडियो देखने को मिलता है। इस वीडियो का निर्माण चित्रों की सहायता से किया गया है जो कि ऐतिहासिक स्मारकों के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत करती हैं। साथ ही वीडियो अध्याय की मांग के अनुरूप प्रभावशाली नहीं बल्कि सामान्य जानकारी के अनुकूल है।
*अध्याय -6, 'सिंचाई के साधन' में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित पाठ का टेक्स्ट पीडीएफ पढ़ने को मिलता है। ऑडियो वीडियो सामग्री अनुपलब्ध है। चूंकि ग्रामीण परिवेश के बच्चे सिंचाई के कई साधनों से परिचित होते हैं परंतु शहरी परिवेश के बच्चों में सिंचाई के साधनों की जानकारी नगण्य होती हैं। साथ ही सिंचाई के परंपरागत साधनों में काफी बदलाव आए हैं। ऐसी स्थिति में इस महत्वपूर्ण अध्याय की समझ बच्चों में विकसित करने के लिए श्रव्य दृश्य सामग्री की उपलब्धता आवश्यक थी। अतः इस पाठ के क्यूआर कोड के माध्यम से एनीमेटेड वीडियो कंटेंट उपलब्ध होने चाहिए थे ताकि क्यूआर कोड की प्रासंगिकता भी सिद्ध हो पाती।
*अध्याय -7, 'जितना खाओ उतना पकाओ' इसके क्यूआर कोड को स्कैन करने पर एक टेक्स्ट पीडीएफ और दो वीडियो देखने को मिलते हैं। दोनों वीडियो भोजन और स्वास्थ्य से संबंधित हैं पर यह काफी संक्षिप्त हैं। साथ ही यह दोनों वीडियो पाठ में दिए गए हैं उदाहरणों के अनुरूप नहीं है।
*अध्याय- 8, 'राॅस की जंग मलेरिया के संग' के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर एक टेक्स्ट पीडीएफ और तीन वीडियो देखने को मिलती हैं। यह वीडियो मच्छरों की उत्पत्ति, उससे होने वाली बीमारियों एवं बचावों से संबंधित है। वीडियो काफी रोचक है जो बच्चों को मच्छर एवं मलेरिया के संबंध में जानकारी देती हैं।
*अध्याय- 9 , 'मैंने नक्शा बनाया' में दिए गए क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक टेक्स्ट पीडीएफ, एक वीडियो और अभ्यास वर्कशीट देखने को मिलती है। वीडियो काफी रोचक है जो दिशाओं का ज्ञान कराती हैं। अभ्यास वर्कशीट के माध्यम से बच्चे नक्शे से संबंधित अपने ज्ञान का मूल्यांकन कर सकते हैं। यह वर्कशीट काफी अच्छी है और इस प्रकार की वर्कशीट सभी अध्याय के अंतर्गत होनी चाहिए थी।
*अध्याय -10, 'हमारी फसलें हमारा खान-पान' में दिए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर सिर्फ टेक्स्ट पीडीएफ पढ़ने को मिलता है । इस पाठ के अंतर्गत गांव - शहरों की आपसी निर्भरता, विभिन्न फसलों ,विभिन्न स्थानों/ राज्यों के खाद्य पदार्थों के बारे में चर्चा की गई हैं। जिसे वीडियो कंटेंट के माध्यम से रोचक तरीके से बतलाया जा सकता था।
इसी प्रकार अन्य QR कोड को भी स्कैन कर एक बार जांच करने की आवश्यकता हैं कि हम जो सामग्री शिक्षक या शिक्षार्थी तक पहुंचा रहे हैं वो अबाद्ध गति से कार्य कर रहा है या नही या फिर ई - सामग्री पाठ से सम्बन्धित अथवा पाठ की आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही है या नही |
निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि क्यूआर कोड की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब हम संबंधित पाठों का उचित वीडियो कंटेंट तथा अभ्यास वर्कशीट भी उपलब्ध करवा सकें। क्योंकि सिर्फ टेक्स्ट पीडीएफ का कोई महत्व नहीं रह जाता जब पहले से ही पाठ्यपुस्तक के रूप में हार्ड कॉपी हमारे पास उपलब्ध है। वीडियो कंटेंट भी जो उपलब्ध है वह पूर्णतया पाठ की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं। अगर वीडियो विशेष रूप से पाठ में दिए गए कंटेंट / उदाहरणों को लेकर बनाया जाए तो बच्चे अपनी पुस्तकों के साथ और ज्यादा जुड़ाव महसूस कर पाएंगे। इसके अलावा पूरक वीडियो का इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्यूआर कोड की प्रिंटिंग भी सुस्पष्ट होनी चाहिए। ताकि स्कैन करने में बच्चों को कोई समस्या/ रुकावट उत्पन्न नहीं हो। इसके अलावा एक और पहल की जा सकती है कि क्यूआर कोड को स्कैन करने पर हम दीक्षा प्लेटफार्म के अलावा या दीक्षा प्लेटफार्म के साथ-साथ अन्य प्लेटफार्म का भी लिंक/ कंटेंट उपलब्ध करा सकते हैं ताकि समुचित ई-सामग्री बच्चों के बीच साझा की जा सके और क्यूआर कोड की सार्थकता भी सिद्ध हो सके।
धन्यवाद।
अध्ययनकर्ता
प्रियंका कुमारी, शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल , परिहार, सीतामढ़ी , बिहार
Comments
Post a Comment