एक साधारण सी सेल्फी एक खास परिवेश और परिस्थिति में रहने वाले बच्चों के लिए एक अमूल्य पुरस्कार और शिक्षक के लिए एक प्रभावशाली संसाधन भी बन सकता है।
क्या है सेल्फी प्राइज - मध्य विद्यालय मलहाटोल,प्रखंड परिहार, सीतामढ़ी की शिक्षिका प्रियंका कुमारी द्वारा सेल्फी प्राइज नाम से एक नवाचार शुरू किया गया जिसमें वह अपने विद्यालय के नव नामांकित बच्चों को सहज करने /अच्छा कार्य करने वाले बच्चों/कुछ अलग गतिविधियां या सवाल करने वाले बच्चों के साथ सेल्फी लेती है जिससे बच्चों में शिक्षक के प्रति अपनापन महसूस होता है और उनका विद्यालय से मजबूत जुड़ाव होता है।
आइए इस आलेख में जानते हैं शिक्षिका प्रियंका कुमारी के अनुभव से कि कैसे एक सेल्फी का उपयोग आप विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों के संदर्भ में कर सकते हैं।
विद्यालय
में बच्चों के ठहराव और नियमित उपस्थिति के लिए हम खेल गतिविधियों का उपयोग हमेशा से करते आए है पर कई बार ऐसा हुआ है कि मुझे बहुत सी गतिविधियों का आइडिया
अपने विद्यालय के बच्चों के माध्यम से मिला है। बच्चों की बातों और रुचियों ने
हमेशा ही मुझे मार्गदर्शित किया है।
बच्चों को विद्यालय से
जोड़ने के लिए बहुत से संसाधन हैं परंतु किस परिवेश में कब,कौन सी गतिविधि आपके लिए एक सफल
संसाधन बन जाए कहा नहीं जा सकता है। मैं एक ऐसे परिवेश में शिक्षण कार्य कर रही
हूं जहां आज भी बहुत हद तक छुआछूत और जातिय मुद्दे अपनी पैठ बनाए हुए हैं। भले ही
हम सभी इन मुद्दों को उपरी तौर पर नकार दे पर हम
सभी जानते हैं कि अभी भी यह समस्या व्याप्त है। ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों की
जिम्मेदारियां और चुनौतियां काफी बढ़ जाती है।जी, हां एक ऐसे परिवेश और समुदाय से संबंधित बच्चें जो शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से
काफी पिछड़े हुए हो वैसे बच्चों के साथ एक सहज आत्मीय संबंध विकसित कर पाना भी
अपने आप में एक चुनौती होती है। बच्चों के साथ खेल कर ,उनकी
पसंद की बातें कर उनके साथ एक जुड़ाव बनाने की कोशिश हमेशा से ही करती रही हूं। पर
बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव विकसित करने के क्रम में सबसे अधिक प्रभावशाली साधन
स्मार्टफोन का साथ साबित हुआ। कुछ वर्ष पूर्व तक स्मार्टफोन रखना सबके पहुंच में
नहीं था। जब मेरी पहुंच स्मार्टफोन तक हुई तब मैंने शायद अपने निजी उपयोग से अधिक
अपने बच्चों के लिए इस फोन का उपयोग करना शुरू किया जिसके परिणामस्वरूप मेरा
बच्चों के साथ एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव विकसित हुआ।
इसलिए मेरे द्वारा सेल्फी
प्राइज नाम से एक नवाचार शुरू किया गया जिसमें मैं अपने विद्यालय के नव नामांकित
बच्चों को सहज करने /अच्छा कार्य करने वाले बच्चों/कुछ अलग गतिविधियां या सवाल
करने वाले बच्चों के साथ सेल्फी लेती हूं जिससे बच्चों में अपने शिक्षक/शिक्षिका
के प्रति अपनापन महसूस होता है और उनका विद्यालय से मजबूत जुड़ाव होता है। इसके
अतिरिक्त भी कई सारे लाभ है जिसे आगे स्पष्ट करूंगी। चूंकि मेरा विद्यालय मध्य
विद्यालय मलहाटोल एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित विद्यालय हैं जहाँ मुख्यत:
मल्लाह, दुसाध और
अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चें नामांकित हैं | लगभग इन सभी
बच्चों के माता-पिता/अभिभावक खेतिहर/दिहाड़ी मजदूरी करने वाले हैं और तो और बच्चों
को भी फसलों के कटाई के मौसम हो या खेतों से आलु निकालने का काम , में शामिल रखते हैं।इनका प्राथमिक लक्ष्य शिक्षा ना हो कर अपनी जीविका चलाना
रहता है। ऐसे में इनका अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति झुकाव/जागरूकता में कमी आना
स्वाभाविक है ।ऐसी परिस्थिति में बच्चों का विधालय से जुड़ाव और उनकी नियमित
उपस्थिति होना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
ऐसे में मेरे द्वारा
बच्चों के साथ भावनात्मक लगाव और प्रोत्साहन तथा विद्यालय से जुड़ाव के लिए उनके
साथ सेल्फी लेना शुरु किया जिसे मैंने सेल्फी प्राइज का नाम दिया | बच्चों के साथ सेल्फी लेने के
नवाचार के कारण ही मेरे विद्यालय की एक बच्ची का ड्रॉपआउट भी रुका |बच्ची के साथ ली गयी सेल्फी किस प्रकार पुनः उसके नियमित विद्यालय आने के
लिए सहायक बनी ,इसकी कहानी मध्यप्रदेश से एकलव्य संस्था द्वारा प्रकाशित शैक्षणिक
पत्रिका सन्दर्भ में छः पृष्ठ में प्रकाशित हैं | इस नवाचार
के कारण बच्चों का मेरे और विद्यालय के साथ एक मजबूत भावनात्मक जुडाव विकसित हुआ
और बच्चें विद्यालय नियमित रूप से आने के लिए प्रेरित हुए।
सेल्फी प्राईज का वितरण नियमित विद्यालय आने , व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखने वाले , अपना काम समय से पूरा करने वाले , खेल या विभिन्न गतिविधियों के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले
बच्चों के बीच किया जाता हैं | बच्चों को सेल्फी की प्रिंटआउट भी मेरे द्वारा दी जाती है जिससे बच्चों में इस सेल्फी प्राइज के लिए एक आकर्षण भी रहता हैं | कितनी ही बार ऐसा होता हैं कि बच्चें खुद से आकर बोलते है की मुझे एक सेल्फी प्राइज चाहिए या कक्षा में भी किसी गतिविधि के प्रदर्शन के बाद फोटो खींच देने का आग्रह करते है तो ये बातें कही न कही हमें इंगित करती है की सेल्फी /तस्वीरें लेना बच्चों में अपने कार्य के प्रति सकारात्मक प्रेरणा देने का कार्य कर रहा हैं |
तो आईये शैक्षिक दृष्टिकोण से सेल्फी प्राईज के उद्देश्य और अधिगम प्रतिफलों पर एक नज़र डालते हैं ---------
1. बच्चों का विद्यालय से जुड़ाव(छीजन में कमी)
2.समाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित होना
3.बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करना
4.अच्छे कार्यों को करने की प्रेरणा विकसित करना
5.व्यवस्थित ढंग से रहने की प्रेरणा का विकास
6.बच्चों
का ड्रेस में रहना
गतिविधियां -
1.बच्चें की वैसी नवाचारी गतिविधि जिससे सीखने - सीखाने
की प्रक्रिया में मदद मिलती है,के करने पर प्रोत्साहन के लिए
बच्चों के साथ सेल्फी लेना।
2.प्रत्येक सप्ताहांत में शारीरिक एवं विद्यालयी स्वच्छता के लिए सक्रिय रहने
वाले बच्चों के साथ सेल्फी लेना।
3. नव नामांकित बच्चों को विद्यालय में सहज करने और आत्मीय जुड़ाव के लिए बच्चों
के साथ सेल्फी लेना।
4.ससमय अपना कार्य पूर्ण करने वाले बच्चों के साथ सेल्फी लेना।
5.शिक्षक-अभिभावक बैठकों के दौरान सेल्फी ली गई बच्चों
के तस्वीरों का प्रदर्शन।
प्रतिफल-
1. बच्चों की विद्यालय में नियमित उपस्थिति
2. बच्चों का शिक्षक के साथ मजबूत भावनात्मक
जुड़ाव होना
3. छीजन में कमी, विद्यालय में ठहराव
4. स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति सजग होना
5. शिक्षक के साथ बच्चों का झिझक दूर होना
6. अधिकांश बच्चों का ड्रेस में आना
यह नवाचार खासकर वैसे परिवेश के लिए काफी असरकारी साबित हो सकता है जहाँ असमानताएं काफी मात्रा में व्याप्त हैं | परन्तु समान्यत: सभी बच्चों को तस्वीरें खिंचवाना पसंद होता हैं इसलिए हम शिक्षक अपने-अपने विद्यालय की परिस्थति और ज़रूरतों के अनुरूप इस नवाचार का प्रयोग कर सकते हैं |
बच्चों की तस्वीरों की मदद से अभी तक मैंने अपने विद्यालय की 200 बच्चों को स्कूल बैग , पानी का बोतल और विभिन्न स्टेशनरी आइटम्स उपलब्ध करवा चुकी हूँ | हमारा नवाचारी प्रयास विद्यालय में अन्य गाँव/प्रखंड के बच्चों का नामांकन बढ़ाने में भी सहायक बना और बच्चो का शिक्षकों से एक मजबूत जुडाव बना |
सेल्फी प्राइज बस एक छोटा सा प्रयास हैं | हमारा साधन कुछ भी हो सकता है ,बस जरुरत है ईमानदार कोशिश की जो हमें बच्चों से जोड़ सकें और उनकी शिक्षा और व्यक्तिव के विकास में सहायक बन सकें |
धन्यवाद
प्रियंका कुमारी , शिक्षिका
मध्य विद्यालय मलहाटोल , परिहार ,सीतामढ़ी ,बिहार

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