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सेल्फी

                                                                             सेल्फी 

यह आलेख सरकारी विद्यालय में नामांकित एक महादलित छात्रा से जुड़ी हैं | इसे पढ़ कर आप जानेंगे कि कैसे उसकी शिक्षिका द्वारा ली गई  एक साधारण सी सेल्फी उस  बच्ची को नियमित स्कूल लाने के लिए टर्निंग पॉइंट  साबित हुई |साथ ही यह आलेख  ड्रॉपआउट को कम करने में भी सहायक साबित हो सकता हैं |


"खुशबू हो हर फूल में , हर बच्चा स्कूल में " इस स्लोगन का उपयोग हम शिक्षक नामांकन अभियान के दौरान किया करते है ,पर इस स्लोगन का मर्म सिर्फ नामांकन अभियान से जुड़ा हुआ नही हैं बल्कि नामांकन के बाद भी बच्चे नियमित रूप से विद्यालयों में उपस्थित होकर सिखने -सिखाने की प्रक्रिया में सहभागी  बने रहने से हैं | नामांकन के प्रारम्भिक दिवसों के बाद भी स्कूल आने के प्रति बच्चों में आकर्षण बनाये रखना एक प्रमुख मुद्दा है |खासकर  सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ कई सारी समस्याएं व्याप्त हैं वहां बच्चों में विद्यालय आने की निरंतरता को कायम रखना सचमुच एक चुनौतीपूर्ण कार्य हैं | पर तमाम चुनौतियों के बीच अगर एक शिक्षक चाहे तो वह सीमित संसाधनों के साथ इन समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकता हैं | 

आइये इसी क्रम में मैं अपना एक अनुभव आपलोग के बीच साझा करना चाहती हूँ जिससे की आप जान पाएंगे की शिक्षक द्वारा किया गया एक छोटा सा प्रयास भी बच्चों को किस प्रकार ड्रॉपआउट से बचाने या विद्यालय नियमित रूप से आने के लिए आकर्षित कर सकता हैं | कुछ महीनों पहले हमारे स्कूल में हीरमल नाम की एक बच्ची ने नामांकन करवाया था जिसका वास्तविक नाम हेमंती हैं |पर उसे खुद को हीरमल कहलाना ही पसंद हैं इसलिए मैं उसे हीरमल कहकर ही बुलाती हूँ |हीरमल कक्षा में काफी चुपचाप रहती हैं और उसके मुख से कुछ बुलवाना निहायत ही मुश्किल काम हैं | फिर भी जब हम पहली बार मिले थे तो उससे बातचीत की शुरुआत आम के फल से की थी क्योकि उस समय आम का मौसम था जो आसानी से हर घर में उपलब्ध होता हैं और बच्चों को आम का फल बहुत पसंद भी आता हैं , इसलिए उसके स्लेट पे आम की तस्वीर भी बनायी और उसका हाथ पकड़ कर  उससे भी अभ्यास करवाया ...पहले तो उसने अपनी काजल लगी आँखों से बड़ी ही मासूमियत से मेरी ओर  देखा और फिर मुझे मुस्कुराता देख  वो काफी खुश हुई और उसकी ख़ुशी को मैंने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद भी कर लिया | हमने साथ में विभिन्न हाव भाव के साथ सेल्फी भी खिंचवाई |मैंने महसूस किया की वो मेरे साथ काफी सहज महसूस कर रही हैं और रूचि ले रही हैं फोटो खिचवाने में |इसलिए मैंने उसे अंग्रेजी में अपना नाम बोलने के लिए प्रेरित किया जिसकी मैं विडियो रिकॉर्डिंग कर रही थी और उसे कैमरे के सामने बोलना अच्छा लग रहा था | इसी तरह बाकी बच्चों के साथ भी मैंने किया| सभी बच्चों ने वो दिन काफी एन्जॉय किया था | 



चूँकि मैं उस कक्षा की शिक्षिका नही थी इसलिए मेरा और हीरमल का मिलना नियमित नही था |फिर भी मेरे मन में उसकी वो मासूम छवि अंकित हो गयी थी जिसे भुलाना मेरे लिए संभव नही था | फिर भी उसकी खोज खबर ले लिया करती थी |पर कई बार सोच के भी उसके बाद से मैं उससे मिल नही पाई थी | साथ ही कुछ अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रतिनियुक्त हो जाने के वजह से मैं स्कूल कुछ दिन नही आ सकी और मेरे उसके मिलने के बीच की दूरियां बढती चली गयी | फिर जब स्कूल आयी और उसके बारे में उसके आस पास के बच्चों से पता किया तो मालूम हुआ की वो स्कूल नही आ रही  इन दिनों | स्कूल ना आने का कारण पूछा तो कोई जबाब बच्चें नही दे पाए | जिससे  थोड़ी निराशा महसूस हुई और फिर मैं अपने काम में लग गयी |

अगले दिन मैं स्कूल थोड़ी जल्दी आ गयी थी |स्कूल में कोई नही आया था तब तक | मैंने सोचा चलो अच्छा है की कोई नही है अभी स्कूल में ,तब तक मैं  हीरमल का पता लगा लूं की वो स्कूल क्यों नही आ रही | स्कूल के सड़क के किनारे कुछ ग्रामीण बैठे थे ,उनमें से एक से पूछा की हीरमल नाम की एक बच्ची है... क्या आप मुझे उसके घर के बारे में बता सकते हैं ? संजोग से हीरमल का घर स्कूल से  थोड़ी ही दुरी पर था ,इसलिए उस आदमी ने मुझे उसका घर दिखा दिया |फिर क्या था...मैं ख़ुशी से उसके घर के तरफ ये सोचते हुए  चल दी कि वो आज मुझ से मिलकर ख़ुशी से झूम उठेगी कि आज दीदी जी( बच्चों के बीच मैं दीदी के नाम से ही जानी जाती हूँ ) मेरे घर पे मुझसे मिलने आई हैं | यही सोचते-सोचते दरवाजे तक पहुची तो देखा की बांस की  टाट और मिट्टी से  बना  घर था जिसके आँगन में बकरी और भैस भी बंधे थे जिसे उसकी दादी चारा दे रही थी | खैर उसकी दादी से पूछा कि हीरमल कहाँ है और वो स्कूल क्यों नही आ रही हैं ? उसकी दादी ने अपना काम करते हुए अनमना सा जबाब दिया कि पता नही क्यों नही जा रही...सब दिन तो कहती ही हूँ फिर भी नही जाती तो मैं  क्या करूं ...फिर मैंने उन्हें बताया कि मैं आज उसे अपने साथ स्कूल ले जाने के लिए आई हूँ आप कृपा कर उसे बुला दीजिये | उन्होंने अपने छोटे बेटे को कहा की उसे बुला कर लाये | दो-चार मिनट के इंतजार के बाद हीरमल घर में से निकल कर आती दिखाई दी |उसे देखते ही मेरी आँखों में चमक और होठों पे मुस्कान तैरने लगी | पर ये क्या ...जैसे ही वो मेरे नजदीक आई मैं स्तब्ध रह गयी ...क्योंकि मुझे देखकर उसके चेहरे पर कोई भाव नही थे |वो काफी सहमी -सहमी सी थी |ऐसा लग रहा था कि जैसे वो मुझे पहली बार देख रही हो |मुझे बड़ा ही अजीब लगा क्योंकि मुझे लग रहा था की वो मुझे देखते ही एक चौड़ी सी मुस्कान के साथ प्रतिक्रिया देगी कि दीदी आप मेरे घर आई हो | पर यहाँ तो सबकुछ उल्टा था |वो मुझे भूल चुकी थी और मुझे देखकर अनजाने भय से सहम रही थी |मैं उसकी मनोस्थितिको भांप गयी थी इसलिए प्यार से उसका हाथ थामते हुए मुस्कुरा कर कहा कि क्या तुम मुझे भूल गयी हो ,मैं तुम्हारी दीदी जी हूँ और मैं तुम्हे स्कूल ले चलने के लिए बुलाने आई हूँ |पर मेरी बातो को अनसुना करते हुए वो धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी ,जिससे कि मुझे काफी तकलीफ महसूस हुई |क्योंकि एक बच्चें का अपने शिक्षक को भूल जाना अत्यंत कष्टकर स्थिति थी | यह असहज स्थिति बतौर शिक्षक मेरे अस्तित्व पर एक प्रश्नचिन्ह की तरह था | मेरा दिमाग अचानक से शून्य में चला गया कि अब मैं  क्या करूं ? उसके परिवार वाले भी नाराज़गी दिखा रहे थे कि तू दीदी को नही पहचान रही और वो चुपचाप मेरी ओर देखे जा रही थी | तभी अचानक से मुझे कुछ याद आया  और मैं पास में पड़ी कुर्सी को खीचतें हुए उसपे बैठ गयी और फटाफट अपने बैग से मोबाइल निकाला ताकि हीरमल को हमारी पहली मुलाकात के बारे में याद दिला सकूं | मैंने मोबाइल की गैलरी में उसकी और अपनी  साथ वाली तस्वीरें और विडियो सर्च की और उसे एक एक कर बिना कुछ कहें दिखाने लगी | अब जैसे -जैसे वो तस्वीरें देख रही थी वैसे -वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे ...इसी क्रम में मैंने पूछा की अब बताओ कुछ याद आया ? इस बार उसने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और फिर फोटो देखने लगी | 

उसकी मुस्कान से मुझे अहसास हो गया था कि अब उसे सबकुछ याद आ गया है |इसलिए मैंने उससे सीधे पूछा की ‘ क्यों  अब स्कूल चलोगी ना ‘...उसने सहमती में सिर हिलाते हुए हाँ कहा और दौड़कर अपनी प्लास्टिक की बोरी में कॉपी कलम ले आई और मुस्कुराते हुए मेरी ऊँगली पकड़ ली  स्कूल जाने के लिए | एक शिक्षक के तौर पर मेरे लिए यह काफी भावुक क्षण था ,क्योकि मोबाइल से ली गयी कुछ सेल्फी के बदौलत आज पुनः मैं इस बच्ची का प्रेम और विश्वास प्राप्त कर पाने में सफल हुई थी | जिस समय ये तस्वीरें मैंने ली थी उस समय बिलकुल भी अंदाजा नही था की यह मेरे अस्तित्व को बचाने के काम आयगा | खैर हमने  इस यादगार पल की एक तस्वीर पुनः अपने  मोबाइल के कैमरे में कैद कर ली | साथ ही हीरमल को और अधिक सहज करने  के लिए  मैंने उसके आँगन में बंधी भैस और बकरी के बारे में पूछा की उसे दोनों में से कौन  ज्यादा पसंद हैं और अगर उसे फोटो खिंचवानी हो तो वो किसके साथ फोटो खिंचाएगी | इस पर उसने अपने भैसों का नाम लिया और फिर हमने मिलकर भैसों के साथ भी सेल्फी ली ,जिसे देखकर वो काफी खुश हुई | इसके बाद वो मेरी ऊँगली थामे स्कूल के लिए चल दी | मैं भी सारे रास्ते एक ‘विश्व विजेता’ की तरह उसके हाथ को थामे गर्व के साथ चल पड़ी , क्योकि उसका मेरी ऊँगली को पकड़कर स्कूल चलना एक शिक्षक के तौर पर बहुत बड़ी जीत थी मेरी …|

मैंने अपने इस अनुभव को संक्षिप्त रूप में अपने सोशल अकाउंट “ लिंक्डइन “ पर शेयर किया ,क्योकिं मैं आज का दिन भूलना नही चाहती थी और मैं लोगो तक ये संदेश भी देना चाहती थी की एक साधारण सी तस्वीर भी समय आने पर एक असाधारण मदद कर सकती हैं | इस पोस्ट पर काफी सकारात्मक फीडबैक मिले जिससे मुझे हीरमल के लिए कुछ और भी करने की प्रेरणा मिली | इसलिए मैंने अपने लिंक्डइन कनेक्शन के सामने ये रिक्वेस्ट रख दी की हीरमल प्लास्टिक की बोरी में किताब लेके पढने आती हैं ,क्या आपलोगों में से कोई भी उसे एक छोटा सा स्कूल बैग गिफ्ट करना पसंद करेंगे ताकि इस बच्ची के अंदर स्कूल आने की स्थाई प्रेरणा का भी विकास हो सके  ..? इस रिक्वेस्ट पर धनबाद ,झारखण्ड के एक इलेक्ट्रिक इंजीनिअर श्री त्रिभुवन राय ने तुरंत रिप्लाई किया कि वो इस बच्ची के लिए स्कूल बैग भेजेंगे | इस रिप्लाई को देखकर काफी ख़ुशी हुई की आज भी मदद करने वाले हाथों की कोई कमी नही हैं | मैंने अपना पोस्टल एड्रेस त्रिभुवन जी से शेयर किया और उन्होंने एक घंटे के अन्दर ही ऑनलाइन शौपिंग प्लेटफार्म  फ्लिप्कार्ट  से एक आकर्षक सा स्कूल बैग बच्ची के लिए आर्डर कर दिया जो एक सप्ताह बाद मुझे सीतामढ़ी में मिल गया | यह काफी अद्भुत अनुभव था मेरे लिए क्योकि बिना किसी जान पहचान के त्रिभुवन जी से यह मदद मुझे प्राप्त हुई थी | फिर बैग मिलने के अगले दिन मैं  उसे हीरमल को देने के लिए स्कूल आई तो देखा की वो सबसे पहले अपने भाई के साथ स्कूल पहुंची हुई थी ,जिसे देख मुझे काफी ख़ुशी हुई | क्योकि हीरमल को बैग मिलने के बारे में कुछ भी पता नही था | हीरमल को उसकी दादी के उपस्थिति में मैंने स्कूल बैग के साथ साथ अपनी ओर से एक कॉपी और पेंसिल भी दिया और उससे वादा लिया की वो रोज दिन स्कूल आएगी | फिर उसके साथ फोटो खिचवाई ताकि जिन्होंने ये स्कूल बैग भेजा था उन्हें कन्फर्म कर सकू की उनकी मदद सही जगह पर पहुच चुकी हैं |

स्कूल से लौटते वक़्त मैं पुनः हीरमल के घर जाकर उसकी माँ और दादी से मिली ताकि मैं परिवार वालों  से भी ये वादा ले सकूं की वो बच्ची को नियमित रूप से विधालय भेजने में कोई कोताही नही बरतेंगे | सबने वादा किया की वो बच्ची को निश्चित रूप से स्कूल भेजेंगे और इस वादें को पुनः मैंने एक तस्वीर में कैद कर लिया ...क्योंकि अगर मेरे पास तस्वीरे न होती तो शायद ही इतनी सहजता से मैं अपनी छात्रा हीरमल का प्रेम और विश्वास पुनः प्राप्त कर पाती और स्वेच्छा से उसे विद्यालय लाने में समर्थ हो पाती | आज वो प्रतिदिन स्कूल आ रही हैं| उसकी दादी ने  भी एक दिन बताया की वो स्कूल के समय से पहले ही  दो तीन बार आके देख जाती है की दीदी आयी है या नही…….यह सुनकर ह्रदय में एक अपार संतुष्टि का अनुभव हुआ |

…..इस पुरे अनुभव को आप सभी के साथ साझा करने का एक ही प्रमुख उद्देश्य था कि हमारे पास जो भी सीमित संसाधन हैं हम उसका प्रभावी प्रयोग अपने विद्यालय और छात्रों के लिए कर सकते हैं |ये जरुरी नही है कि सिर्फ तस्वीरें लेकर  ही हम बच्चों को आकर्षित कर सकते है,| हमारा तरीका या हमारे संसाधन कुछ भी हो सकते हैं जो बच्चों को नियमित विधालय आने के प्रति आकर्षित कर सकता है |जरुरत बस एक चीज की हैं - और वो हैं हमारी ईमानदार एवम् मजबूत इच्छाशक्ति की ,जो कि हमें बच्चों के साथ जोड़ने के लिए पर्याप्त हैं | साथ ही हमारे जो भी संपर्क हैं या जिस भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़े हैं उसका बेहतर सदुपयोग हम अपने विद्यालय एवम् आस -पास के गरीब छात्रों की बेहतरी क लिए कर सकते हैं | क्योंकि  वर्तमान समय में सोशल प्लेटफॉर्म्स सिर्फ मनोरंजन का जरिया मात्र नही रह गये हैं बल्कि यह सामाजिक सहयोग , परिवर्तन एवम् मानवता में भी अपनी सहभागिता निभा रहा हैं |इसलिए सकराताम्कता फैलाते रहे और शिक्षा की ज्योति से नवीन भारत के नौनिहालों को प्रकाशित करते रहें |

धन्यवाद |



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